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बप्पदेव

From जैनकोष



उत्कलिका ग्राम के समीप ‘मणवल्ली’ ग्राम में आपने आचार्य शुभनन्दि व रविनन्दि से ज्ञान व उपदेश प्राप्त करके षट्‌खण्ड के प्रथम ५ खण्डों पर ६०००० श्लोक प्रमाण ‘व्याख्या प्रज्ञप्ति’ नाम की टीका तथा कषाय पाहुड़ की भी एक ‘उच्चारणा’ नाम की संक्षिप्त टीका लिखी । पीछे वाटग्राम (बड़ौदा) के जिनालय में इस टीका के दर्शन करके श्री वीरसेनस्वामी ने षट्‌खण्ड के पाँच खण्डों पर धवला नाम की टीका रची थी । समय - ई.श. १ (विशेष देखें - परिशिष्ट ) ।

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