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बाह्य

From जैनकोष



  1. स.सि. /९/१९/४३९/३  बाह्यद्रव्यापेक्षत्वात्परप्रत्याक्षत्वाच्च बाह्यत्वम्‌ । = बाह्य द्रव्य के आलम्बन से होता है, और दूसरों के देखने में आता है, इसलिए इसे बाह्य (तप) कहते हैं ।
  2. परमार्थ बाह्य - देखें - परमार्थ ।

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