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ब्रह्मदेव

From जैनकोष



बाल ब्रह्मचारी होने के कारण ही आपका यह नाम पड़ गया । कृतियें - द्रव्यसंग्रह टीका, परमात्म प्रकाश टीका, तत्त्व दीपक, ज्ञान दीपक, त्रिवर्णाचार दीपक, प्रतिष्ठा तिलक, विवाह पटल, कथाकोष । समय - इनकी भाषा क्योंकि जयसेन आचार्य के साथ शब्दशः मिलती है इसलिये डा. एन. उपाध्ये जयसेनाचार्य (वि.श. १२-१३) के परवर्ती मानकर इन्हें वि.श. १३-१४ में स्थापित करते हैं परन्तु डा. नेमिचन्द्र के अनुसार जयसेन तथा पं. आशाधर ने ही इनका अनुसरण किया है, इन्होंने उनका नहीं । जयसेनाचार्य ने पंचास्तिकाय की टीका में द्रव्यसंग्रह की टीका का नामोल्लेख किया है । अतः इनका समय उनसे पूर्व अर्थात्‌ वि.श. ११-१२ सिद्ध होता है । (ती./३/३११-३१३) । (जै./२/२०३,३६३) ।

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