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शीलपाहुड़ गाथा 30

From जैनकोष

जइ विसयलोलएहिं णाणीहि हविज्ज साहिदो मोक्खो ।
तो सो सच्चइपुत्ते दसपुव्वीओ वि किं गदो णरयं ॥३०॥
यदि विषयलोलै: ज्ञानिभि: भवेत्‌ साधित: मोक्ष: ।
तर्हि स: सात्यकिपुत्र: दशपूर्विक: किं गत: नरकं ॥३०॥


आगे कहते हैं कि शील के बिना ज्ञान ही से मोक्ष नहीं है, इसका उदाहरण कहते हैं
अर्थ - जो विषयों में लोल अर्थात्‌ लोलुप आसक्त और ज्ञानसहित, ऐसे ज्ञानियों ने मोक्ष साधा हो तो दशपूर्व को जाननेवाला रुद्र नरक को क्यों गया ?
भावार्थ - शुष्क कोरे ज्ञान ही से मोक्ष किसी ने साधा कहें तो दश पूर्व का पाठी रुद्र नरक क्यों गया ? इसलिए शील के बिना केवल ज्ञान ही से मोक्ष नहीं है, रुद्र कुशील सेवन करनेवाला हुआ, मुनिपद से भ्रष्ट होकर कुशील सेवन किया इसलिए नरक में गया, यह कथा पुराणों में प्रसिद्ध है ॥३०॥


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