• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

विदुर: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 19:24, 6 September 2022 (view source)
Prabha (talk | contribs)
mNo edit summary
← Older edit
Latest revision as of 15:21, 27 November 2023 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
 
(One intermediate revision by one other user not shown)
Line 1: Line 1:


== सिद्धांतकोष से ==
== सिद्धांतकोष से ==
पां.पु./सर्ग/श्लोक–भीष्म के सौतेले भाई व्यास का पुत्र। (7/117)। कौरव पांडवों के युद्ध में इन्होंने काफी भाग लिया। कौरवों को बहुत समझाया पर वे न माने। (19/187)। अंत में दीक्षित हो गये। (19/5-7)।
<p class="HindiText">पां.पु./सर्ग/श्लोक–भीष्म के सौतेले भाई व्यास का पुत्र। (7/117)। कौरव पांडवों के युद्ध में इन्होंने काफी भाग लिया। कौरवों को बहुत समझाया पर वे न माने। (19/187)। अंत में दीक्षित हो गये। (19/5-7)।</p>


<noinclude>
<noinclude>
Line 13: Line 13:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p> कौरववंशी पाराशर के मत्स्यकुल में उत्पन्न बुद्धिमान् व्यास और रानी सुभद्रा के तीसरे पुत्र। ये धृतराष्ट्र और पांडु के छोटे भाई थे। इनका विवाह राजा देवक की कन्या कुमुद्वती के साथ हुआ था। न्यायमार्ग में स्थित पांडवों के ये परम हितैषी थे। इन्होंने कौरवों पर विश्वास न करने का पांडवों को उपदेश दिया था। पांडवों को लाक्षागृह के संकट से बचने के लिए गुप्त रूप से लाक्षागृह में इन्होंने ही सुरंग का निर्माण कराया था। इन्होंने पांडवों और कौरवों के मध्य चलते हुए विरोध को देखकर दोनों को आधा-आधा राज्य देकर संतुष्ट करने का धृतराष्ट्र को परामर्श दिया था। दुर्योधन के न मानने पर विरक्त इन्होंने मुनि विश्वकीर्ति से मुनिदीक्षा ले ली थी। <span class="GRef"> हरिवंशपुराण  </span>के अनुसार इनकी माँ का नाम अंबा था। राजा दुर्योधन, द्रोण तथा दुःशासन आदि ने इन्हीं से दीक्षा ली थी। <span class="GRef"> महापुराण 70.101-103,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण  </span>45.33-34, 52.88, <span class="GRef"> पांडवपुराण 7.116-117, 8.111, 12.89-109, 18.187-191, 19.6-7 </span></p>
<div class="HindiText">  <p class="HindiText"> कौरववंशी पाराशर के मत्स्यकुल में उत्पन्न बुद्धिमान् व्यास और रानी सुभद्रा के तीसरे पुत्र। ये धृतराष्ट्र और पांडु के छोटे भाई थे। इनका विवाह राजा देवक की कन्या कुमुद्वती के साथ हुआ था। न्यायमार्ग में स्थित पांडवों के ये परम हितैषी थे। इन्होंने कौरवों पर विश्वास न करने का पांडवों को उपदेश दिया था। पांडवों को लाक्षागृह के संकट से बचने के लिए गुप्त रूप से लाक्षागृह में इन्होंने ही सुरंग का निर्माण कराया था। इन्होंने पांडवों और कौरवों के मध्य चलते हुए विरोध को देखकर दोनों को आधा-आधा राज्य देकर संतुष्ट करने का धृतराष्ट्र को परामर्श दिया था। दुर्योधन के न मानने पर विरक्त इन्होंने मुनि विश्वकीर्ति से मुनिदीक्षा ले ली थी। <span class="GRef"> हरिवंशपुराण  </span>के अनुसार इनकी माँ का नाम अंबा था। राजा दुर्योधन, द्रोण तथा दुःशासन आदि ने इन्हीं से दीक्षा ली थी। <span class="GRef"> महापुराण 70.101-103,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण  </span>45.33-34, 52.88, <span class="GRef"> पांडवपुराण 7.116-117, 8.111, 12.89-109, 18.187-191, 19.6-7 </span></p>
   </div>
   </div>



Latest revision as of 15:21, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

पां.पु./सर्ग/श्लोक–भीष्म के सौतेले भाई व्यास का पुत्र। (7/117)। कौरव पांडवों के युद्ध में इन्होंने काफी भाग लिया। कौरवों को बहुत समझाया पर वे न माने। (19/187)। अंत में दीक्षित हो गये। (19/5-7)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

कौरववंशी पाराशर के मत्स्यकुल में उत्पन्न बुद्धिमान् व्यास और रानी सुभद्रा के तीसरे पुत्र। ये धृतराष्ट्र और पांडु के छोटे भाई थे। इनका विवाह राजा देवक की कन्या कुमुद्वती के साथ हुआ था। न्यायमार्ग में स्थित पांडवों के ये परम हितैषी थे। इन्होंने कौरवों पर विश्वास न करने का पांडवों को उपदेश दिया था। पांडवों को लाक्षागृह के संकट से बचने के लिए गुप्त रूप से लाक्षागृह में इन्होंने ही सुरंग का निर्माण कराया था। इन्होंने पांडवों और कौरवों के मध्य चलते हुए विरोध को देखकर दोनों को आधा-आधा राज्य देकर संतुष्ट करने का धृतराष्ट्र को परामर्श दिया था। दुर्योधन के न मानने पर विरक्त इन्होंने मुनि विश्वकीर्ति से मुनिदीक्षा ले ली थी। हरिवंशपुराण के अनुसार इनकी माँ का नाम अंबा था। राजा दुर्योधन, द्रोण तथा दुःशासन आदि ने इन्हीं से दीक्षा ली थी। महापुराण 70.101-103, हरिवंशपुराण 45.33-34, 52.88, पांडवपुराण 7.116-117, 8.111, 12.89-109, 18.187-191, 19.6-7


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=विदुर&oldid=128777"
Categories:
  • व
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 15:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki