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जयंती: Difference between revisions

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   <li> <span class="HindiText">रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्‍कुमारी देवी– देखें - [[ लोक#5.13 | लोक / ५ / १३ ]]; </span></li>
== सिद्धांतकोष से ==
   <li class="HindiText"> नन्‍दीश्‍वरद्वीप की पश्चिम दिशा में स्थित वापी– देखें - [[ लोक#5.13 | लोक / ५ / १३ ]]; </li>
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   <li class="HindiText"> अपर विदेहस्‍थ महावप्र क्षेत्र की मुख्‍य नगरी– देखें - [[ लोक#5.2 | लोक / ५ / २ ]];  </li>
   <li> <span class="HindiText">रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्कुमारी देवी–देखें [[ लोक#5.13 | लोक - 5.13]]; </span></li>
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   <li class="HindiText"> एक मन्‍त्रविद्या–देखें - [[ विद्या | विद्या।  ]]</li>
   <li class="HindiText"> अपर विदेहस्थ महावप्र क्षेत्र की मुख्य नगरी–देखें [[ लोक#5.2 | लोक - 5.2]];  </li>
   <li class="HindiText"> भरतक्षेत्र का एक नगर–देखें [[ मनुष्य#4 | मनुष्य - 4]]; </li>
   <li class="HindiText"> एक मंत्रविद्या–देखें [[ विद्या ]]। </li>
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== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1" class="HindiText"> (1) एक मंत्र परिस्कृत विद्या । धरणेंद्र ने यह विद्या नमि और विनमि को दी थी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_22#70|हरिवंशपुराण - 22.70-73]] </span></p>
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<p id="6" class="HindiText">(6) रुचकवरगिरि के सर्वरत्न कूट की निवासिनी देवी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#726|हरिवंशपुराण - 5.726]] </span></p>
<p id="7" class="HindiText">(7) रुपकवरगिरि के कनककूट की निवासिनी एक दिक्कुमारी देवी । <span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#705|हरिवंशपुराण - 5.705]] </span></p>
<p id="8" class="HindiText">(8) विदेहक्षेत्र के महावप्र देश की मुख्य नगरी । <span class="GRef"> महापुराण 63. 2 11, 216,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:हरिवंश पुराण_-_सर्ग_5#251|हरिवंशपुराण - 5.251]],263 </span></p>
  </div>
 
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[[Category: पुराण-कोष]]
[[Category: ज]]
[[Category: प्रथमानुयोग]]
[[Category: करणानुयोग]]

Latest revision as of 15:10, 27 November 2023



सिद्धांतकोष से

  1. रुचक पर्वत निवासिनी एक दिक्कुमारी देवी–देखें लोक - 5.13;
  2. नंदीश्वरद्वीप की पश्चिम दिशा में स्थित वापी–देखें लोक - 5.13;
  3. अपर विदेहस्थ महावप्र क्षेत्र की मुख्य नगरी–देखें लोक - 5.2;
  4. भरतक्षेत्र का एक नगर–देखें मनुष्य - 4;
  5. एक मंत्रविद्या–देखें विद्या ।


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पुराणकोष से

(1) एक मंत्र परिस्कृत विद्या । धरणेंद्र ने यह विद्या नमि और विनमि को दी थी । हरिवंशपुराण - 22.70-73

(2) राजा चरम द्वारा रेवा नदी के तट पर बसायी गयी एक नगरी । हरिवंशपुराण - 17.27

(3) विजयार्ध की दक्षिणश्रेणी की इकतीसवीं नगरी । महापुराण 19. 50, 53

(4) मथुरा नगरी के राजा मधु की महादेवी । पद्मपुराण - 89.50-11

(5) नंदीश्वर द्वीप के दक्षिण दिशा संबंधी अंजनगिरि की पश्चिम दिशा में स्थित वापी । हरिवंशपुराण - 5.660

(6) रुचकवरगिरि के सर्वरत्न कूट की निवासिनी देवी । हरिवंशपुराण - 5.726

(7) रुपकवरगिरि के कनककूट की निवासिनी एक दिक्कुमारी देवी । हरिवंशपुराण - 5.705

(8) विदेहक्षेत्र के महावप्र देश की मुख्य नगरी । महापुराण 63. 2 11, 216, हरिवंशपुराण - 5.251,263


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