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अयोध्या: Difference between revisions

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Revision as of 18:59, 23 March 2023 (view source)
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<p class="HindiText">1. अपर विदेहस्थ गंधमालिनी क्षेत्र की मुख्य नगरी- देखें [[ लोक#5.2 | लोक - 5.2]];<br>
<p class="HindiText">1. अपर विदेहस्थ गंधमालिनी क्षेत्र की मुख्य नगरी- देखें [[ लोक#5.2 | लोक - 5.2]];<br>
2. अयोध्या, साकेत, सुकौशला और विनीता ये सब एक ही नगर के नाम हैं।
2. अयोध्या, साकेत, सुकौशला और विनीता ये सब एक ही नगर के नाम हैं।
   (<span class="GRef"> महापुराण सर्ग संख्या 12/73</span>)।</p>
   <span class="GRef">( महापुराण सर्ग संख्या 12/73)</span>।</p>


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== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) धातकीखंड द्वीप के पश्चिम विदेह क्षेत्र में स्थित गंधिक देश का नगर । जयवर्मा इस नगर का नृप था । <span class="GRef"> महापुराण 7.40-41, 59.277 </span></p>
<div class="HindiText">  <p id="1">(1) धातकीखंड द्वीप के पश्चिम विदेह क्षेत्र में स्थित गंधिक देश का नगर । जयवर्मा इस नगर का नृप था । <span class="GRef"> महापुराण 7.40-41, 59.277 </span></p>
<p id="2">(2) जंबूद्वीप में आर्यखंड के कोशल देश की नगरी । यह नगरी सरयू नदी के किनारे इंद्र द्वारा नाभिराय और मरुदेवी के लिए रची गयी थी । सुकौशल देश में स्थित होने से इसे सुकौशल और विनीत लोगों की आवासभूमि होने से विनीता भी कहा गया है । यह अयोध्या इसलिए थी कि इसके सुयोजित निर्माण कौशल के कारण इसे शत्रु नहीं जीत सकते थे । सुंदर भवनों के निर्माण के कारण इसे साकेत भी कहा जाता था । यह नौ योजन चौड़ी, बारह योजन लंबी और अड़तीस योजन परिधि की थी । बलभद्र राम यही जन्मे थे । <span class="GRef"> महापुराण 12.69-82, 14.67-170, 71, 16.152, 29.47, 71.255-256,  </span><span class="GRef"> पद्मपुराण 81. 116-124,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 9.42, 10.163,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 2.108,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 4.121 </span></p>
<p id="2">(2) जंबूद्वीप में आर्यखंड के कोशल देश की नगरी । यह नगरी सरयू नदी के किनारे इंद्र द्वारा नाभिराय और मरुदेवी के लिए रची गयी थी । सुकौशल देश में स्थित होने से इसे सुकौशल और विनीत लोगों की आवासभूमि होने से विनीता भी कहा गया है । यह अयोध्या इसलिए थी कि इसके सुयोजित निर्माण कौशल के कारण इसे शत्रु नहीं जीत सकते थे । सुंदर भवनों के निर्माण के कारण इसे साकेत भी कहा जाता था । यह नौ योजन चौड़ी, बारह योजन लंबी और अड़तीस योजन परिधि की थी । बलभद्र राम यही जन्मे थे । <span class="GRef"> महापुराण 12.69-82, 14.67-170, 71, 16.152, 29.47, 71.255-256,  </span><span class="GRef"> [[ग्रन्थ:पद्मपुराण_-_पर्व_81#116|पद्मपुराण - 81.116-124]],  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 9.42, 10.163,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 2.108,  </span><span class="GRef"> वीरवर्द्धमान चरित्र 4.121 </span></p>
<p id="3">(3) जंबूद्वीप के ऐरावत क्षेत्र की नगरी, राजा श्रीवर्मा की आवासभूमि । <span class="GRef"> महापुराण 59.282 </span></p>
<p id="3">(3) जंबूद्वीप के ऐरावत क्षेत्र की नगरी, राजा श्रीवर्मा की आवासभूमि । <span class="GRef"> महापुराण 59.282 </span></p>
<p id="4">(4) धातकीखंड द्वीप के दक्षिण की ओर और इष्वाकार पर्वत से पूर्व की ओर रुचित अलका नामक देश का नगर । इस द्वीप में इस नाम के दो भिन्न-भिन्न नगर थे जिनमें गंधिल देश से संबंधित नगर में जयवर्मा तथा अलका देश से संबंधित नगर में जयवर्मा का पुत्र अतितंजय रहता था । <span class="GRef"> महापुराण 7.40-41, 12. 76, 54.86-47  </span></p>
<p id="4">(4) धातकीखंड द्वीप के दक्षिण की ओर और इष्वाकार पर्वत से पूर्व की ओर रुचित अलका नामक देश का नगर । इस द्वीप में इस नाम के दो भिन्न-भिन्न नगर थे जिनमें गंधिल देश से संबंधित नगर में जयवर्मा तथा अलका देश से संबंधित नगर में जयवर्मा का पुत्र अतितंजय रहता था । <span class="GRef"> महापुराण 7.40-41, 12. 76, 54.86-47  </span></p>

Revision as of 22:15, 17 November 2023

सिद्धांतकोष से

1. अपर विदेहस्थ गंधमालिनी क्षेत्र की मुख्य नगरी- देखें लोक - 5.2;
2. अयोध्या, साकेत, सुकौशला और विनीता ये सब एक ही नगर के नाम हैं। ( महापुराण सर्ग संख्या 12/73)।


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पुराणकोष से

(1) धातकीखंड द्वीप के पश्चिम विदेह क्षेत्र में स्थित गंधिक देश का नगर । जयवर्मा इस नगर का नृप था । महापुराण 7.40-41, 59.277

(2) जंबूद्वीप में आर्यखंड के कोशल देश की नगरी । यह नगरी सरयू नदी के किनारे इंद्र द्वारा नाभिराय और मरुदेवी के लिए रची गयी थी । सुकौशल देश में स्थित होने से इसे सुकौशल और विनीत लोगों की आवासभूमि होने से विनीता भी कहा गया है । यह अयोध्या इसलिए थी कि इसके सुयोजित निर्माण कौशल के कारण इसे शत्रु नहीं जीत सकते थे । सुंदर भवनों के निर्माण के कारण इसे साकेत भी कहा जाता था । यह नौ योजन चौड़ी, बारह योजन लंबी और अड़तीस योजन परिधि की थी । बलभद्र राम यही जन्मे थे । महापुराण 12.69-82, 14.67-170, 71, 16.152, 29.47, 71.255-256, पद्मपुराण - 81.116-124, हरिवंशपुराण 9.42, 10.163, पांडवपुराण 2.108, वीरवर्द्धमान चरित्र 4.121

(3) जंबूद्वीप के ऐरावत क्षेत्र की नगरी, राजा श्रीवर्मा की आवासभूमि । महापुराण 59.282

(4) धातकीखंड द्वीप के दक्षिण की ओर और इष्वाकार पर्वत से पूर्व की ओर रुचित अलका नामक देश का नगर । इस द्वीप में इस नाम के दो भिन्न-भिन्न नगर थे जिनमें गंधिल देश से संबंधित नगर में जयवर्मा तथा अलका देश से संबंधित नगर में जयवर्मा का पुत्र अतितंजय रहता था । महापुराण 7.40-41, 12. 76, 54.86-47

(5) विदेहक्षेत्र के गंधावत्सुगंधा देश की राजधानी । महापुराण 63. 208-217, हरिवंशपुराण 5.263


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