• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

कनक: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 14:29, 3 August 2022 (view source)
Komaljain7 (talk | contribs)
No edit summary
← Older edit
Revision as of 20:23, 8 February 2023 (view source)
J2jinendra (talk | contribs)
No edit summary
Newer edit →
Line 13: Line 13:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
  <span class="HindiText">(1)स्वर्ण अर्थ में व्यवहृत शब्द ।<span><span class="GRef"> महापुराण 3.36 </br> <span class="HindiText"> (2)भविष्यत् कालीन प्रथम कुलकर । <span><span class="GRef">महापुराण 76.483, हरिवंशपुराण 60.555 </br><span class="HindiText"> (3)धृतराष्ट्र तथा उसकी रानी गांधारी का पुत्र ।<span><span class="GRef"> पांडवपुराण 8.205 </br><span class="HindiText"> (4) धृतवर समुद्र का रक्षक देव । <span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.642 </br><span class="HindiText"> (5) कुंडलगिरि की पूर्व दिशा का एक कूट । यह महाशिरस् नामक देव की निवासभूमि था ।<span> <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.690 </br><span class="HindiText"> (6) कनकाभ नगर का राजा । कनकश्री इसकी रानी तथा कनकावली इसकी पुत्री थी । <span> <span class="GRef">पद्मपुराण 6.567 </br><span class="HindiText"> (7) एक राजा । इसकी रानी का नाम संध्या, तथा पुत्री का नाम विद्युत्प्रभा था ।<span> <span class="GRef"> दशानन इसका जामाता था । पद्मपुराण 8.105 </br> <span class="HindiText"> (8) एक शस्त्र । इससे रथ तोड़े जा सकते थे । <span><span class="GRef"> पद्मपुराण 12.211,234 </br><span class="HindiText"> (9) मृत्तिकावपी नगरी का निवासी वणिक् । <span><span class="GRef">यह बंधुदत्त का पिता था । पद्मपुराण 48.43 </br><span class="HindiText"> (10) रावण का व्याघ्ररथी योद्धा ।<span><span class="GRef">पद्मपुराण 57.49-52 </br><span class="HindiText"> (11) राजा जनक का अनुज । म्लेच्छराज के साथ हुए युद्ध में यह लड़ा था । यह सम्यग्दृष्टि था । मरकर यह आनत स्वर्ग में देव हुआ था ।<span class="GRef"> पद्मपुराण 27.50-51, 123.80-81 </span>
  <span class="HindiText">(1)स्वर्ण अर्थ में व्यवहृत शब्द ।</span><span class="GRef"> महापुराण 3.36 </span> <br>
<span class="HindiText"> (2)भविष्यत् कालीन प्रथम कुलकर । </span><span class="GRef">महापुराण 76.483, हरिवंशपुराण 60.555 </span><br>
<span class="HindiText"> (3)धृतराष्ट्र तथा उसकी रानी गांधारी का पुत्र ।</span><span class="GRef"> पांडवपुराण 8.205 </span><br>
<span class="HindiText"> (4) धृतवर समुद्र का रक्षक देव । </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.642 </span><br>
<span class="HindiText"> (5) कुंडलगिरि की पूर्व दिशा का एक कूट । यह महाशिरस् नामक देव की निवासभूमि था ।</span> <span class="GRef"> हरिवंशपुराण 5.690 </span><br>
<span class="HindiText"> (6) कनकाभ नगर का राजा । कनकश्री इसकी रानी तथा कनकावली इसकी पुत्री थी ।</span> <span class="GRef">पद्मपुराण 6.567 </span><br>
<span class="HindiText"> (7) एक राजा । इसकी रानी का नाम संध्या, तथा पुत्री का नाम विद्युत्प्रभा था ।दशानन इसका जामाता था ।</span><span class="GRef"> पद्मपुराण 8.105 </span><br>
<span class="HindiText"> (8) एक शस्त्र । इससे रथ तोड़े जा सकते थे । <span><span class="GRef"> पद्मपुराण 12.211,234 </span><br>
<span class="HindiText"> (9) मृत्तिकावपी नगरी का निवासी वणिक् । यह बंधुदत्त का पिता था ।</span><span class="GRef"> पद्मपुराण 48.43 </span><br>
<span class="HindiText"> (10) रावण का व्याघ्ररथी योद्धा ।</span><span class="GRef">पद्मपुराण 57.49-52 </span><br>
<span class="HindiText"> (11) राजा जनक का अनुज । म्लेच्छराज के साथ हुए युद्ध में यह लड़ा था । यह सम्यग्दृष्टि था । मरकर यह आनत स्वर्ग में देव हुआ था ।<span class="GRef"> पद्मपुराण 27.50-51, 123.80-81 </span></span>
    
    



Revision as of 20:23, 8 February 2023



सिद्धांतकोष से

दक्षिण क्षौद्रवर द्वीप तथा घृतवर समुद्र के रक्षक व्यंतर देव–देखें व्यंतर - 4।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1)स्वर्ण अर्थ में व्यवहृत शब्द । महापुराण 3.36  

(2)भविष्यत् कालीन प्रथम कुलकर । महापुराण 76.483, हरिवंशपुराण 60.555
(3)धृतराष्ट्र तथा उसकी रानी गांधारी का पुत्र । पांडवपुराण 8.205
(4) धृतवर समुद्र का रक्षक देव । हरिवंशपुराण 5.642
(5) कुंडलगिरि की पूर्व दिशा का एक कूट । यह महाशिरस् नामक देव की निवासभूमि था । हरिवंशपुराण 5.690
(6) कनकाभ नगर का राजा । कनकश्री इसकी रानी तथा कनकावली इसकी पुत्री थी । पद्मपुराण 6.567
(7) एक राजा । इसकी रानी का नाम संध्या, तथा पुत्री का नाम विद्युत्प्रभा था ।दशानन इसका जामाता था । पद्मपुराण 8.105
(8) एक शस्त्र । इससे रथ तोड़े जा सकते थे । पद्मपुराण 12.211,234
(9) मृत्तिकावपी नगरी का निवासी वणिक् । यह बंधुदत्त का पिता था । पद्मपुराण 48.43
(10) रावण का व्याघ्ररथी योद्धा ।पद्मपुराण 57.49-52
(11) राजा जनक का अनुज । म्लेच्छराज के साथ हुए युद्ध में यह लड़ा था । यह सम्यग्दृष्टि था । मरकर यह आनत स्वर्ग में देव हुआ था । पद्मपुराण 27.50-51, 123.80-81


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=कनक&oldid=110279"
Categories:
  • क
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 8 February 2023, at 20:23.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki