• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अरविंद: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:30, 5 July 2020 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
m (Vikasnd moved page अरविन्‍द to अरविन्द without leaving a redirect: RemoveZWNJChar)
← Older edit
Revision as of 16:30, 5 July 2020 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
m (Vikasnd moved page अरविन्‍द to अरविन्द without leaving a redirect: RemoveZWNJChar)
Newer edit →
(No difference)

Revision as of 16:30, 5 July 2020



(1) महाबल विद्याधर के वंश मे उत्पन्न एक विद्याधर । इसने अपने पिता से राज्य प्राप्त किया था । यह अलका नगरी का शासक था । हरिचन्द्र और कुरुविन्द इसके पुत्र थे । इसे दाहज्वर हो गया था । दैवयोग से लड़ती हुई हो छिपकलियों में एक की पूँछ कट जाने से निकला रुधिर इसके शरीर पर जा गिरा और इसका दाहज्‍वर शान्त हो गया । फलस्वरूप आर्त्तध्यान इसने अपने पुत्र से रुधिर से भरी हुई एक वापी बनाने की इच्छा प्रकट की । मुनि से पिता का मरण अत्यन्त निकट जानकर पुत्र ने पापभय से वापी को रुधिर से न भरवाकर लाख के घोल से भरवा दिया । इसने वापी रुधिर भरी जानकर हर्ष मनाया किन्तु पुत्र का कपट ज्ञात होने पर वह पुत्र को मारने दौड़ा तथा गिरकर अपनी ही तलवार से मरण को प्राप्त हुआ, और नरक में उत्पन्न हुआ । महापुराण 5.89-114

(2) जम्बूद्वीप के दक्षिण भरतक्षेत्र में स्थित सुरम्य देश के पोदनपुर नगर का राजा । इसी नगर के निवासी विश्‍वभूति ब्राह्मण के पुत्र कमठ और मरुभूति इसके मंत्री थे । मरुभूति को कमठ ने मार डाला था जो मरकर वज्रघोष नाम का हाथी हुआ । इसके संयम धारण करने पर किसी समय इस हाथी ने इसे वन में देखा और जैसे ही वह इसे मारने को उद्यत हुआ उसने इसके शरीर पर श्रीवत्स का चिन्ह देखा । उसे पूर्वभव का अपना सम्बन्धी जान लिया और मारने के अपने उद्यम से विरत हो गया । शान्त होकर इसने इसी से श्रावक के व्रत ग्रहण कर लिये तथा अन्त मे मरकर सहस्रार स्वर्ग में देव हुआ । महापुराण 73.6-24


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अरविंद&oldid=31682"
Categories:
  • पुराण-कोष
  • अ
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 5 July 2020, at 16:30.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki