• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

निबंधन: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 15:19, 19 August 2020 (view source)
Vikasnd (talk | contribs)
m (Vikasnd moved page निबन्धन to निबंधन: RemoveFifthCharsTitles)
← Older edit
Revision as of 16:26, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
<ol>
<ol>
   <li><strong name="1" id="1"><span class="HindiText">निबन्धन</span></strong> <br> सर्वार्थसिद्धि/1/26/133/7 –<span class="SanskritText">निबन्धनं निबन्ध:।</span> =<span class="HindiText">निबन्धन शब्द का व्युत्पत्तिलभ्य  अर्थ है जोड़ना, सम्बन्ध करना। (</span> राजवार्तिक/1/26/ .../87/8)।        धवला 15/1/10  <span class="PrakritText">निबध्यते  तदस्मिन्निति निबन्धनम्, जं दव्वं जाम्ह णिबद्धं तं णिबंधणं ति भणिदं होदि। </span>=<span class="HindiText">’निबध्यते  तदस्मिन्निति निबन्धनम्’ इस निरुक्ति के अनुसार जो द्रव्य जिसमें सम्बद्ध है  उसे निबन्धन कहा जाता है। </span></li>
   <li><strong name="1" id="1"><span class="HindiText">निबंधन</span></strong> <br> सर्वार्थसिद्धि/1/26/133/7 –<span class="SanskritText">निबंधनं निबंध:।</span> =<span class="HindiText">निबंधन शब्द का व्युत्पत्तिलभ्य  अर्थ है जोड़ना, संबंध करना। (</span> राजवार्तिक/1/26/ .../87/8)।        धवला 15/1/10  <span class="PrakritText">निबध्यते  तदस्मिन्निति निबंधनम्, जं दव्वं जाम्ह णिबद्धं तं णिबंधणं ति भणिदं होदि। </span>=<span class="HindiText">’निबध्यते  तदस्मिन्निति निबंधनम्’ इस निरुक्ति के अनुसार जो द्रव्य जिसमें संबद्ध है  उसे निबंधन कहा जाता है। </span></li>
   <li><span class="HindiText"><strong name="2" id="2"> द्रव्य क्षेत्रादि  निबन्धन</strong> </span><br> धवला 15/2/10  <span class="PrakritText">जं दव्वं जाणि  दव्वाणि अस्सिदूण परिणमदि जस्स वा दव्वस्स सहावो दव्वंतरपडिबद्धो तं दव्वणिबंधणं।  खेत्तणिबंधणं णाम गामणयरादीणि, पडिणियदखेत्ते तेसिं पडिबद्धत्तुवलंभादो। जो जम्हि  काले पडिबद्धो अत्थो तक्कालणिबंधणं। तं जहा–चुअफुल्लाणि चेत्तमासणिक्द्धाणि ...तत्थेव  तेसिमुवलंभादो। ...पंचरत्तियाओ णिबंधो त्ति वा। जं दव्वं भावस्स आलंबणमाहारो  होदि तं भावणिबंधणं। जहा लोहस्स हिरण्णसुवण्णादीणि णिबंधणं, ताणि अस्सिऊण तदुप्पत्तिदंसणादो,  उप्पण्णस्स वि लोहस्स तदावलंबणदंसणादो।</span> =<span class="HindiText">जो द्रव्य जिन द्रव्यों का आश्रय  करके परिणमन करता है, अथवा जिस द्रव्य का स्वभाव द्रव्यान्तर से प्रतिबद्ध है  वह द्रव्यनिबन्धन कहलाता है। ग्राम व नगर आदि क्षेत्रनिबन्धन हैं; क्योंकि,  प्रतिनियत क्षेत्र में उनका सम्बन्ध पाया जाता है। जो अर्थ जिस काल में  प्रतिबद्ध है वह काल निबन्धन कहा जाता है। यथा–आम्र वृक्ष के फूल चैत्र मास से  सम्बद्ध हैं...क्योंकि वे इन्हीं मासों में पाये जाते हैं। अथवा पंचरात्रिक  निबन्धन कालनिबन्धन है (?)। जो द्रव्य भाव का अवलंबन अर्थात् आधार होता है, वह  भाव निबन्धन होता है। जैसे–लोभ के चाँदी, सोना आदिक हैं; क्योंकि, उनका आश्रय  करके लोभ की उत्पत्ति देखी जाती है, तथा उत्पन्न हुआ लोभ भी उनका आलम्बन देखा  जाता है।</span></li>
   <li><span class="HindiText"><strong name="2" id="2"> द्रव्य क्षेत्रादि  निबंधन</strong> </span><br> धवला 15/2/10  <span class="PrakritText">जं दव्वं जाणि  दव्वाणि अस्सिदूण परिणमदि जस्स वा दव्वस्स सहावो दव्वंतरपडिबद्धो तं दव्वणिबंधणं।  खेत्तणिबंधणं णाम गामणयरादीणि, पडिणियदखेत्ते तेसिं पडिबद्धत्तुवलंभादो। जो जम्हि  काले पडिबद्धो अत्थो तक्कालणिबंधणं। तं जहा–चुअफुल्लाणि चेत्तमासणिक्द्धाणि ...तत्थेव  तेसिमुवलंभादो। ...पंचरत्तियाओ णिबंधो त्ति वा। जं दव्वं भावस्स आलंबणमाहारो  होदि तं भावणिबंधणं। जहा लोहस्स हिरण्णसुवण्णादीणि णिबंधणं, ताणि अस्सिऊण तदुप्पत्तिदंसणादो,  उप्पण्णस्स वि लोहस्स तदावलंबणदंसणादो।</span> =<span class="HindiText">जो द्रव्य जिन द्रव्यों का आश्रय  करके परिणमन करता है, अथवा जिस द्रव्य का स्वभाव द्रव्यांतर से प्रतिबद्ध है  वह द्रव्यनिबंधन कहलाता है। ग्राम व नगर आदि क्षेत्रनिबंधन हैं; क्योंकि,  प्रतिनियत क्षेत्र में उनका संबंध पाया जाता है। जो अर्थ जिस काल में  प्रतिबद्ध है वह काल निबंधन कहा जाता है। यथा–आम्र वृक्ष के फूल चैत्र मास से  संबद्ध हैं...क्योंकि वे इन्हीं मासों में पाये जाते हैं। अथवा पंचरात्रिक  निबंधन कालनिबंधन है (?)। जो द्रव्य भाव का अवलंबन अर्थात् आधार होता है, वह  भाव निबंधन होता है। जैसे–लोभ के चाँदी, सोना आदिक हैं; क्योंकि, उनका आश्रय  करके लोभ की उत्पत्ति देखी जाती है, तथा उत्पन्न हुआ लोभ भी उनका आलंबन देखा  जाता है।</span></li>
</ol>
</ol>
<p>&nbsp;</p>
<p>&nbsp;</p>


<noinclude>
<noinclude>
[[ निबन्ध | पूर्व पृष्ठ ]]
[[ निबंध | पूर्व पृष्ठ ]]


[[ निमंत्रण | अगला पृष्ठ ]]
[[ निबद्ध मंगल | अगला पृष्ठ ]]


</noinclude>
</noinclude>
[[Category: न]]
[[Category: न]]

Revision as of 16:26, 19 August 2020



  1. निबंधन
    सर्वार्थसिद्धि/1/26/133/7 –निबंधनं निबंध:। =निबंधन शब्द का व्युत्पत्तिलभ्य अर्थ है जोड़ना, संबंध करना। ( राजवार्तिक/1/26/ .../87/8)। धवला 15/1/10 निबध्यते तदस्मिन्निति निबंधनम्, जं दव्वं जाम्ह णिबद्धं तं णिबंधणं ति भणिदं होदि। =’निबध्यते तदस्मिन्निति निबंधनम्’ इस निरुक्ति के अनुसार जो द्रव्य जिसमें संबद्ध है उसे निबंधन कहा जाता है।
  2. द्रव्य क्षेत्रादि निबंधन
    धवला 15/2/10 जं दव्वं जाणि दव्वाणि अस्सिदूण परिणमदि जस्स वा दव्वस्स सहावो दव्वंतरपडिबद्धो तं दव्वणिबंधणं। खेत्तणिबंधणं णाम गामणयरादीणि, पडिणियदखेत्ते तेसिं पडिबद्धत्तुवलंभादो। जो जम्हि काले पडिबद्धो अत्थो तक्कालणिबंधणं। तं जहा–चुअफुल्लाणि चेत्तमासणिक्द्धाणि ...तत्थेव तेसिमुवलंभादो। ...पंचरत्तियाओ णिबंधो त्ति वा। जं दव्वं भावस्स आलंबणमाहारो होदि तं भावणिबंधणं। जहा लोहस्स हिरण्णसुवण्णादीणि णिबंधणं, ताणि अस्सिऊण तदुप्पत्तिदंसणादो, उप्पण्णस्स वि लोहस्स तदावलंबणदंसणादो। =जो द्रव्य जिन द्रव्यों का आश्रय करके परिणमन करता है, अथवा जिस द्रव्य का स्वभाव द्रव्यांतर से प्रतिबद्ध है वह द्रव्यनिबंधन कहलाता है। ग्राम व नगर आदि क्षेत्रनिबंधन हैं; क्योंकि, प्रतिनियत क्षेत्र में उनका संबंध पाया जाता है। जो अर्थ जिस काल में प्रतिबद्ध है वह काल निबंधन कहा जाता है। यथा–आम्र वृक्ष के फूल चैत्र मास से संबद्ध हैं...क्योंकि वे इन्हीं मासों में पाये जाते हैं। अथवा पंचरात्रिक निबंधन कालनिबंधन है (?)। जो द्रव्य भाव का अवलंबन अर्थात् आधार होता है, वह भाव निबंधन होता है। जैसे–लोभ के चाँदी, सोना आदिक हैं; क्योंकि, उनका आश्रय करके लोभ की उत्पत्ति देखी जाती है, तथा उत्पन्न हुआ लोभ भी उनका आलंबन देखा जाता है।

 


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=निबंधन&oldid=60798"
Category:
  • न
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 19 August 2020, at 16:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki