• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

सुकेतु: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:39, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:58, 14 November 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==

== सिद्धांतकोष से ==
म.प्र./59/श्लो.नं. श्रावस्ती नगरी का राजा था (72)। जुए में सर्वस्व हारने पर दीक्षा ग्रहणकर कठिन तप किया। (82-83) कला, चतुरता आदि गुणों का निदान कर लांतव स्वर्ग में देव हुआ (85) यह धर्म नारायण का पूर्व का दूसरा भव है-देखें [[ धर्म ]]।
म.प्र./59/श्लो.नं. श्रावस्ती नगरी का राजा था (72)। जुए में सर्वस्व हारने पर दीक्षा ग्रहणकर कठिन तप किया। (82-83) कला, चतुरता आदि गुणों का निदान कर लांतव स्वर्ग में देव हुआ (85) यह धर्म नारायण का पूर्व का दूसरा भव है-देखें [[ धर्म ]]।


Line 12: Line 13:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
  <p id="1"> (1) जंबूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती देश की मृणालवती नगरी का राजा । इसने अर्ककीर्ति और जयकुमार के बीच हुए युद्ध में जयकुमार का पक्ष लिया था । यह मुकुटबद्ध राजा था । <span class="GRef"> महापुराण 44.106-107,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 3. 94-95, 187-188 </span></p>
<div class="HindiText"> <p id="1"> (1) जंबूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती देश की मृणालवती नगरी का राजा । इसने अर्ककीर्ति और जयकुमार के बीच हुए युद्ध में जयकुमार का पक्ष लिया था । यह मुकुटबद्ध राजा था । <span class="GRef"> महापुराण 44.106-107,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 3. 94-95, 187-188 </span></p>
<p id="2">(2) मृणालवती नगरी का एक सेठ । यह रतिवर्मा का पुत्र था । इसकी सी कनकश्री और पुत्र भवदेव था । <span class="GRef"> महापुराण 46. 103-104  </span></p>
<p id="2">(2) मृणालवती नगरी का एक सेठ । यह रतिवर्मा का पुत्र था । इसकी सी कनकश्री और पुत्र भवदेव था । <span class="GRef"> महापुराण 46. 103-104  </span></p>
<p id="3">(3) विजयार्ध पर्वत पर स्थित रथनूपुर नगर का राजा । कृष्ण की पटरानी सत्यभामा इसकी पुत्री थी । <span class="GRef"> महापुराण 71.301, 313,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 36.56, 61 </span></p>
<p id="3">(3) विजयार्ध पर्वत पर स्थित रथनूपुर नगर का राजा । कृष्ण की पटरानी सत्यभामा इसकी पुत्री थी । <span class="GRef"> महापुराण 71.301, 313,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 36.56, 61 </span></p>
Line 18: Line 19:
<p id="5">(5) एक विद्याधर । पद्म चक्रवर्ती ने अपनी आठों पुत्रियों का विवाह इसी के पुत्रों के साथ किया था । <span class="GRef"> महापुराण 66.76-80 </span></p>
<p id="5">(5) एक विद्याधर । पद्म चक्रवर्ती ने अपनी आठों पुत्रियों का विवाह इसी के पुत्रों के साथ किया था । <span class="GRef"> महापुराण 66.76-80 </span></p>
<p id="6">(6) गंधवती नगरी के सोम पुरोहित का ज्येष्ठ पुत्र । यह प्रेमवश अपने भाई अग्निकेतु के साथ ही शयन किया करता था । विवाहित होने पर पृथक्-पृथक् शय्या किये जाने पर प्रतिबोध को प्राप्त होकर इसने अनंतवीर्य मुनि से दीक्षा ले ली । इसका भाई प्रथम तो तापस हो गया था, किंतु बाद में इसके द्वारा समझाये जाने पर उसने भी दिगंबरी दीक्षा ले ली थी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 41.115-136 </span></p>
<p id="6">(6) गंधवती नगरी के सोम पुरोहित का ज्येष्ठ पुत्र । यह प्रेमवश अपने भाई अग्निकेतु के साथ ही शयन किया करता था । विवाहित होने पर पृथक्-पृथक् शय्या किये जाने पर प्रतिबोध को प्राप्त होकर इसने अनंतवीर्य मुनि से दीक्षा ले ली । इसका भाई प्रथम तो तापस हो गया था, किंतु बाद में इसके द्वारा समझाये जाने पर उसने भी दिगंबरी दीक्षा ले ली थी । <span class="GRef"> पद्मपुराण 41.115-136 </span></p>
  </div>


<noinclude>
<noinclude>

Revision as of 16:58, 14 November 2020



सिद्धांतकोष से

म.प्र./59/श्लो.नं. श्रावस्ती नगरी का राजा था (72)। जुए में सर्वस्व हारने पर दीक्षा ग्रहणकर कठिन तप किया। (82-83) कला, चतुरता आदि गुणों का निदान कर लांतव स्वर्ग में देव हुआ (85) यह धर्म नारायण का पूर्व का दूसरा भव है-देखें धर्म ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) जंबूद्वीप के पूर्व विदेहक्षेत्र में पुष्कलावती देश की मृणालवती नगरी का राजा । इसने अर्ककीर्ति और जयकुमार के बीच हुए युद्ध में जयकुमार का पक्ष लिया था । यह मुकुटबद्ध राजा था । महापुराण 44.106-107, पांडवपुराण 3. 94-95, 187-188

(2) मृणालवती नगरी का एक सेठ । यह रतिवर्मा का पुत्र था । इसकी सी कनकश्री और पुत्र भवदेव था । महापुराण 46. 103-104

(3) विजयार्ध पर्वत पर स्थित रथनूपुर नगर का राजा । कृष्ण की पटरानी सत्यभामा इसकी पुत्री थी । महापुराण 71.301, 313, हरिवंशपुराण 36.56, 61

(4) धर्म नारायण के दूसरे पूर्वभव का जीव । यह श्रावस्ती नगरी का राजा था । जुए में अपना सब कुछ हार जाने से शोक से व्याकुलित होकर इसने दीक्षा ले ली थी तथा कठिन तपश्चरण करने से कला, गुण, चतुरता और बल प्रकट होने का निदान करके यह संन्यास-मरण करके लांतव स्वर्ग में देव हुआ । महापुराण 59.72, 81-85, देखें धर्म - 3

(5) एक विद्याधर । पद्म चक्रवर्ती ने अपनी आठों पुत्रियों का विवाह इसी के पुत्रों के साथ किया था । महापुराण 66.76-80

(6) गंधवती नगरी के सोम पुरोहित का ज्येष्ठ पुत्र । यह प्रेमवश अपने भाई अग्निकेतु के साथ ही शयन किया करता था । विवाहित होने पर पृथक्-पृथक् शय्या किये जाने पर प्रतिबोध को प्राप्त होकर इसने अनंतवीर्य मुनि से दीक्षा ले ली । इसका भाई प्रथम तो तापस हो गया था, किंतु बाद में इसके द्वारा समझाये जाने पर उसने भी दिगंबरी दीक्षा ले ली थी । पद्मपुराण 41.115-136


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=सुकेतु&oldid=78709"
Categories:
  • स
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 14 November 2020, at 16:58.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki