• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अवपीड़क

From जैनकोष

Revision as of 22:39, 24 May 2009 by Vikasnd (talk | contribs)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)

भगवती आराधना / मुल या टीका गाथा संख्या ४७४-४७८ आलोचणागुणदोसे कोई सम्म पि पण्णविज्जंतो। तिव्वेहिं गारवादिहिं सम्मं णालोचए खवए ।।४७४।। णिद्धं महुरं हिदयंगमं च पल्हादणिज्जमेगंते। कोई त्तु पण्ण विज्जंतओ वि णालोचए सम्म ।।४७६।। तो उप्पीलेदव्वा खवयस्सोप्पीलए दोसा से वामेइ मंसमुदर मिव गदं सीहो जह सियालं ।।४७७।। उज्जसी तेजस्सी वच्चस्सी पहिदकित्तियायरिओ। पज्जेइ घदं माया तस्सेव हिदं विचिंतंती ।।४७९।।

= आलोचना करनेसे गुण और न करनेसे दोष की प्राप्ति होती है, यह बात अच्छी तरहसे समझानेपर भी कोई क्षपक तीव्र अभिमान या लज्जा आदिके कारण अपने दोष कहनेमें उद्युक्त नहीं होता है ।।४७४।। स्निग्ध, कर्णमधुर व हृदयमें प्रवेश करनेवाला ऐसा भाषण बोलनेपरभी कोई क्षपक अपने दोषोंकी आलोचना नहीं करता ।।४७६।। तब अवपीडक्र गुणधारक आचार्य क्षपकके दोषोंको जबरीसे बाहर निकालते हैं, जैसे सिंह सियालके पेटमें भी चला गया मांस वमन करवाता है ।।४७७।। उत्पीलक या अवपीडक गुणधारक आचार्य ओजस्वी, बलवान् और तेजस्वी प्रतापवान् होते हैं; तथा सबमुनियोंपर अपना रौब जमानेवाले होते हैं। वेवर्चस्वी अर्थात् प्रश्न का उत्तर देनेमें कुशल होते हैं, उनकी कीर्ति चारों दिशाओंमें रहती है। वे सिंह समान अक्षोभ्य रहते हैं। वे किसीसे नहीं डरते।

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अवपीड़क&oldid=6050"
Categories:
  • अ
  • भगवती आराधना
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 24 May 2009, at 22:39.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki