• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

लोकपाल

From जैनकोष

Revision as of 19:14, 17 July 2020 by Maintenance script (talk | contribs) (Imported from text file)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)

== सिद्धांतकोष से ==

  1. लोकपाल निर्देश
    सर्वार्थसिद्धि/4/4/239/5 अर्थचरा रक्षकसमाना लोकपालाः । लोकं पालयन्तीति लोकपालाः ।=जो रक्षक के समान अर्थचर हैं वे लोकपाल कहलाते हैं । तात्पर्य यह है कि जो लोक का पालन करते हैं वे लोकपाल कहलाते हैं ( राजवार्तिक/4/4/6/213/4 ); ( महापुराण/22/28 ) ।
    तिलोयपण्णत्ति/3/66 चत्तारि लोयपाला सावण्णा होंति तंतवलाणं । तणुरक्खाण समाणा सरीररक्खा सुरा सव्वे ।66। = (इन्द्रों के परिवार में से) चारों लोकपाल तन्त्रपालों के सदृश... होते हैं ।
    त्रिलोकसार भाषा/224 जैसे राजा का सेनापति तैसे इन्द्र के लोकपाल दिगीन्द्र हैं ।
  2. चारों दिशाओं के रक्षक चार लोकपाल
    1. इन्द्र की अपेक्षा
      तिलोयपण्णत्ति/3/71 पत्तेक्कइंदयाणं सोमो यमवरुणधणदणामा य । पुव्वादि लोयपाला हवंति चत्तारि चत्तारि ।71। = प्रत्येक इन्द्र के पूर्वादि दिशाओं के रक्षक क्रम से सोम, यम, वरुण और धनद (कुबेर) नामक चार-चार लोकपाल होते हैं ।71।
    2. पूजा मण्डप की अपेक्षा
      प्रतिष्ठासारोद्धार/3/187-188 पूर्वदिशा का इन्द्र ; आग्नेय का अग्नि, दक्षिण कायम; नैर्ऋत्य का नैर्ऋत्य, पश्चिम का वरुण, वायव्यका वायु, उत्तर का कुबेर, ईशान का सोम व धरणेन्द्र ।
  3. प्रतिष्ठा मण्डप के द्वारपालों का नाम निर्देश
    प्रतिष्ठासारोद्धार/2/139 कुमुद, अञ्जन, वामन, पुष्पदन्त, नाग, कुबेर, हरितप्रभ, रत्नप्रभ, कृष्णप्रभव देव ।
  4. वैमानिक इन्द्रों के लोकपालों का परिवार
    तिलोयपण्णत्ति/8/287-299 सौधर्म, ईशान, सनत्कुमार, माहेन्द्र, ब्रह्म, लांतव, महाशुक्र, सहस्रार और अग्नतादि चार  इन सब इन्द्रों के चार-चार लोकपाल हैं−सोम, यम, वरुण व कुबेर। इन चारों का परिवार क्रम से निम्न प्रकार है−
    1. देवियाँ−प्रत्येक की 3½ करोड़।
    2. आभ्यन्तर परिषद्−50, 50, 60, 70।
    3. मध्यम परिषद्−400, 400, 500, 600।
    4. बाह्य परिषद्−500, 500, 600, 700।
    5. चारों के ही अनीकों में सामन्त अपने-अपने इन्द्रों की अपेक्षा क्रम से 4000, 4000, 1000, 1000, 500, 400, 300, 200, 100 हैं।
    6. सभी इन्द्रों के चारों ही लोकपालों को प्रथम कक्ष में सामान्य = 28000 और शेष कक्षों में उत्तरोत्तर दूने-दूने हैं।
    7. वृषभादि −3556000।
    8. कुल अनीक−24892000।
    9. विमान−6666666।
  5. सौधर्म इन्द्र के लोकपाल द्विचरम शरीरी हैं
    तिलोयपण्णत्ति/8/375-376 सक्को सहग्गमहिसी सलोयवालो...णियमा दुचरिमदेहा...। अग्रमहिषी और लोकपालों सहित सौधर्म इन्द्र.....नियम से द्विचरम शरीर हैं।
  • अन्य सम्बन्धित विषय
    1. लोकपाल देव सामान्य के 10 विकल्पों में से एक है−देखें देव - 1।
    2. भवनवासी व वैमानिक इन्द्रों के परिवारों में लोकपालों का निर्देशादि।−देखें भवनवासी आदि भेद ।
    3. जन्म, शरीर, आहार, सुख, दुःख, सम्यक्त्व आदि विषयक।−देखें दे - II.2।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) इन्द्र द्वारा नियुक्त लोक-रक्षक । ये चार हैं― सोम, यम, वरुण और कुबेर । प्रत्येक दिशा में एक होने से में चारों दिशाओं में चार होते हैं । प्रत्येक लोकपाल की बत्तीस देवियां होती है । महापुराण 10. 192, 22.28, पद्मपुराण 7.28, हरिवंशपुराण 5.323-327, वीरवर्द्धमान चरित्र 6.132-133

(2) जम्बूद्वीप की पुण्डरीकिणी नगरी के राजा प्रजापाल का पुत्र । इसकी दो बहिनें थीं― गुणवती और यशस्वती । इसके पिता इसे राज्य देकर संयमी हो गये थे । महापुराण 46.19-20, 45-48, 51

(3) चन्द्राभनगर के राजा धनपति तथा रानी तिलोत्तमा का पुत्र । इसकी पद्मोत्तम बहिन तथा इकतीस भाई थे । बहिन जीवन्धर को दी गयी थी । महापुराण 75.390-391, 399-401


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=लोकपाल&oldid=48412"
Categories:
  • ल
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 July 2020, at 19:14.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki