आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप

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आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
पुद्गल धर्म अधर्म गगन जम, सब जड़ मैं चिद्रूप ।।आतम. ।।१ ।।
दरब भाव नोकर्म नियारे, न्यारो आप अनूप ।।आतम. ।।२ ।।
`द्यानत' पर-परनति कब बिनसै, तब सुख विलसै भूप ।।आतम. ।।३ ।।