गलतानमता कब आवैगा

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गलतानमता कब आवैगा
राग-दोष परणति मिट जै है, तब जियरा सुख पावैगा।।गलता. ।।
मैं ही ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय मैं, तीनों भेद मिटावैगा ।
करता किरिया करम भेद मिटि, एक दरव लौं लावैगा ।।गलता. ।।१ ।।
निहचैं अमल मलिन व्योहारी, दोनों पक्ष नसावैगा ।
भेद गुण गुणीको नहिं ह्वै है, गुरु शिख कौन कहावैगा ।।गलता. ।।२ ।।
`द्यानत' साधक साधि एक करि, दुविधा दूर बहावैगा ।
वचनभेद कहवत सब मिटकै, ज्यों का त्यों ठहरावैगा ।।गलता. ।।३ ।।