गौतम स्वामीजी मोहि वानी तनक सुनाई

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गौतम स्वामीजी मोहि वानी तनक सुनाई
जैसी वानी तुमने जानी, तैसी मोहि बताई।।गौतम. ।।१ ।।
जा वानीतैं श्रेणिक समझ्यो, क्षायक समकित पाई।।गौतम.।।२ ।।
`द्यानत' भूप अनेक तरे हैं, वानी सफल सुहाई।।गौतम.।।३ ।।