जिनवरमूरत तेरी, शोभा कहिय न जाय

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जिनवरमूरत तेरी, शोभा कहिय न जाय
रोम रोम लखि हरष होत है, आनँद उर न समाय।।जिन. ।।१ ।।
शांतरूप शिवराह बतावै, आसन ध्यान उपाय।।जिन.।।२ ।।
इंद फनिंद नरिंद विभौ सब, दीसत है दुखदाय।।जिन. ।।३ ।।
`द्यानत' पूजै ध्यावै गावै, मन वच काय लगाय ।।जिन.।।४ ।।