जिनवानी प्रानी! जान लै रे

From जैनकोष

Revision as of 05:04, 11 February 2008 by 69.226.218.78 (talk) (New page: जिनवानी प्रानी! जान लै रे<br> छहों दरब परजाय गुन सरब, मन नीके सरधान लै रे।।ज...)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)

जिनवानी प्रानी! जान लै रे
छहों दरब परजाय गुन सरब, मन नीके सरधान लै रे।।जिनवानी. ।।१ ।।
देव धरम गुरु निहचै धर उर, पूजा दान प्रमान लै रे।।जिनवानी.।।२ ।।
`द्यानत' जान्यो जैन बखान्यो, $ अक्षर मन आन लै रे।।जिनवानी.।।३ ।।