जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै

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जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै
विषय प्रगट विष-बेल हैं, इनमें जिन अटकै।।जिन नाम. ।।
दुर्लभ नरभव पायकै, नगसों मत पटकै ।
फिर पीछैं पछतायगो, औसर जब सटकै ।।जिन नाम. ।।१ ।।
एक घरी है सफल जो, प्रभु-गुन-रस गटकै ।
कोटि वरष जीयो वृथा, जो थोथा फटकै ।।जिन नाम. ।।२ ।।
`द्यानत' उत्तम भजन है, लीजै मन रटकै ।
भव भवके पातक सबै, जै हैं तो कटकै ।।जिन नाम. ।।३ ।।