Actions

जिन रागद्वेष त्यागा वह सतगुरु हमारा

From जैनकोष

Revision as of 03:13, 16 February 2008 by 76.211.231.33 (talk)
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)

जिन रागद्वेष त्यागा वह सतगुरु हमारा ।।टेक ।।
तज राजरिद्ध तृणवत निज काज सँभारा ।।जिन राग. ।।
रहता है वह वनखंड में, धरि ध्यान कुठारा ।
जिन मोह महा तरुको, जड़मूल उखारा।।१ ।।जिन राग. ।।
सर्वांग तज परिग्रह, दिगअंबर धारा ।
अनंतज्ञानगुन समुद्र, चारित्र भँडारा।।२ ।।जिन राग. ।।
शुक्लाग्नि को प्रजाल के, वसु कानन जारा ।
ऐसे गुरु को `दौल' है, नमोऽस्तु हमारा।।३ ।।जिन राग. ।।