Difference between revisions of "थांकी तो वानी में हो"

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Latest revision as of 11:32, 14 February 2008

(राग मल्हार)
थांकी तो वानी में हो, निज स्वपरप्रकाशक ज्ञान ।।टेक ।।
शीतल होत सुबुद्धिमेदिनी, मिटत भवातपपीर ।।१ ।।
करुनानदी बहै चहुँ दिसितैं, भरी सो दोई तीर ।।२ ।।
`भागचन्द' अनुभव मंदिर को, तजत न संत सुधीर ।।३ ।।