Difference between revisions of "भगवन्त भजन क्यों भूला रे"

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Latest revision as of 07:34, 16 February 2008

== भगवन्त भजन क्यों भूला रे == (राग सोरठ)

भगवन्त भजन क्यों भूला रे ।।टेक ।।
यह संसार रैन का सुपना, तन धन वारि बबूला रे ।।
इस जीवन का कौन भरोसा, पावक में तृण-पूलारे ।
काल कुदार लिये सिर ठाड़ा, क्या समझै मन फूला रे ।।१ ।।
स्वारथ साधै पाँच पाँव तू, परमारथ को लूला रे ।
कहु कैसे सुख पैहै प्राणी, काम करै दुखमूला रे ।।२ ।।
मोह पिशाच छल्यो मति मारै, निज कर कंध वसूला रे ।
भज श्रीराजमतीवर `भूधर', दो दुरमति सिर धूला रे ।।३ ।।