भाई काया तेरी दुखकी ढेरी

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भाई काया तेरी दुखकी ढेरी
भाई काया तेरी दुखकी ढेरी, बिखरत सोच कहा है ।
तेरे पास सासतौ तेरो, ज्ञानशरीर महा है ।।भाई ।।
ज्यों जल अति शीतल ह्वै काचौ, भाजन दाह दहा है ।
त्यों ज्ञानी सुखशान्त कालका, दुख समभाव सहा है ।।भाई. ।।१ ।।
बोदे उतरैं नये पहिरतैं, कौंने खेद गहा है ।
जप तप फल परलोक लहैं जे, मरकै वीर कहा है ।।भाई. ।।२ ।।
`द्यानत' अन्तसमाधि चहैं मुनि, भागौं दाव लहा है ।
बहु तज मरण जनम दुख पावक, सुमरन धार बहा है ।।भाई. ।।३ ।।