चक्रायुध २

From जैनकोष

( महापुराण/59/ श्लोक नं.)–पूर्वभव नं.3 में भद्रमित्र सेठ; पूर्वभव नं.2 में सिंहचंद्र, पूर्वभव नं.1 में प्रीतिंकर देव था।(316)। वर्तमान भव में जंबूद्वीप के चक्रपुर नगर का राजा अपराजित का पुत्र हुआ।239। राज्य की प्राप्ति कर।244। कुछ समय पश्चात् अपने पुत्र रत्नायुध को राज्य दे दीक्षा धारण कर मोक्ष प्राप्त की।245।


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