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चक्षुष्मान्

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

  1. दक्षिण मानुषोत्तर पर्वत का रक्षक व्यंतर देव–देखें व्यंतर ।4।
  2. अपर पुष्करार्ध का रक्षक व्यंतर देव–देखें व्यंतर 4.7 ।
  3. आठवें कुलकर–देखें सोलह कुलकर निर्देश ।9।


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पुराणकोष से

(1) आठवें मनु/कुलकर । ये सातवें कुलकर विपुलवाहन के पुत्र थे तथा नौवें कुलकर यशस्वी के पिता । इनके पूर्व माता-पिता पुत्र का मुख तथा चक्षु देखे बिना ही मर जाते थे । इनके समय से वे पुत्र का मुख और चक्षु देखकर मरने लगे थे । इससे उत्पन्न प्रजा-भय को दूर करने से प्रजा ने इन्हें इस नाम से संबोधित किया था । ये बहुत काल तक भोग भोगकर स्वर्ग गये । महापुराण 3. 120-125, हरिवंशपुराण - 7.157-160, पांडवपुराण 2. 106 पद्मपुराण में इन्हें सीमंधर के बाद हुए बताया है । इन्होंने सूर्य और चंद्र देखकर भयभीत प्रजा के भय का निवारण किया था । पद्मपुराण 2.79-85

(2) मानुषोतर पर्वत का रक्षक देव । महापुराण 5.639


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