• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

Help
 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

सन्मति: Difference between revisions

From जैनकोष

Revision as of 16:38, 19 August 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
← Older edit
Revision as of 16:58, 14 November 2020 (view source)
Maintenance script (talk | contribs)
(Imported from text file)
Newer edit →
Line 1: Line 1:
== सिद्धांतकोष से ==

== सिद्धांतकोष से ==
1. भगवान् महावीर का अपर नाम था‒देखें [[ महावीर ]]; 2. द्वितीय कुलकर थे‒देखें [[ शलाका पुरुष#9 | शलाका पुरुष - 9]]।
1. भगवान् महावीर का अपर नाम था‒देखें [[ महावीर ]]; 2. द्वितीय कुलकर थे‒देखें [[ शलाका पुरुष#9 | शलाका पुरुष - 9]]।


Line 12: Line 13:


== पुराणकोष से ==
== पुराणकोष से ==
  <p id="1">(1) प्रतिश्रुति कुलकर का पुत्र दूसरा कुलकर । इनकी आयु अमम-काल के बराबर संख्यात वर्षों की थी । शरीर एक हजार तीन सौ धनुष ऊँचा था । इनके समय में ज्योतिरंग कल्पवृक्षों की प्रभा मंद पड़ गई थी । आकाश में सूर्य चंद्र तारे और नक्षत्र दिखाई देने लगे थे । इन्होंने प्रजा को सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण, ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि पर जाना, दिन और अयन आदि का संक्रमण बतलाते हुए ज्योतिष विद्या की मूल बातें बताई थी । ये तीसरे मनु क्षेमंकर को राज्य देकर स्वर्ग गये । <span class="GRef"> महापुराण 3. 77-89,  </span><span class="GRef"> पद्मपुराण 3.77,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 7.148-150,  </span>पाप0 2. 105</p>
<div class="HindiText"> <p id="1">(1) प्रतिश्रुति कुलकर का पुत्र दूसरा कुलकर । इनकी आयु अमम-काल के बराबर संख्यात वर्षों की थी । शरीर एक हजार तीन सौ धनुष ऊँचा था । इनके समय में ज्योतिरंग कल्पवृक्षों की प्रभा मंद पड़ गई थी । आकाश में सूर्य चंद्र तारे और नक्षत्र दिखाई देने लगे थे । इन्होंने प्रजा को सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण, ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि पर जाना, दिन और अयन आदि का संक्रमण बतलाते हुए ज्योतिष विद्या की मूल बातें बताई थी । ये तीसरे मनु क्षेमंकर को राज्य देकर स्वर्ग गये । <span class="GRef"> महापुराण 3. 77-89,  </span><span class="GRef"> पद्मपुराण 3.77,  </span><span class="GRef"> हरिवंशपुराण 7.148-150,  </span>पाप0 2. 105</p>
<p id="2">(2) तीर्थंकर वर्द्धमान का अपर नाम संजय और विजय नामक चारण ऋद्धिधारियों ने अपना उत्पन्न संदेह वर्द्धमान को देखते ही दूर हो जाने से प्रसन्न होकर वर्द्धमान का यह नाम रखा था । <span class="GRef"> पद्मपुराण 74.282-283,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 1.116  </span>देखें [[ महावीर ]]</p>
<p id="2">(2) तीर्थंकर वर्द्धमान का अपर नाम संजय और विजय नामक चारण ऋद्धिधारियों ने अपना उत्पन्न संदेह वर्द्धमान को देखते ही दूर हो जाने से प्रसन्न होकर वर्द्धमान का यह नाम रखा था । <span class="GRef"> पद्मपुराण 74.282-283,  </span><span class="GRef"> पांडवपुराण 1.116  </span>देखें [[ महावीर ]]</p>
  </div>


<noinclude>
<noinclude>

Revision as of 16:58, 14 November 2020



सिद्धांतकोष से

1. भगवान् महावीर का अपर नाम था‒देखें महावीर ; 2. द्वितीय कुलकर थे‒देखें शलाका पुरुष - 9।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) प्रतिश्रुति कुलकर का पुत्र दूसरा कुलकर । इनकी आयु अमम-काल के बराबर संख्यात वर्षों की थी । शरीर एक हजार तीन सौ धनुष ऊँचा था । इनके समय में ज्योतिरंग कल्पवृक्षों की प्रभा मंद पड़ गई थी । आकाश में सूर्य चंद्र तारे और नक्षत्र दिखाई देने लगे थे । इन्होंने प्रजा को सूर्यग्रहण चंद्रग्रहण, ग्रहों का एक राशि से दूसरी राशि पर जाना, दिन और अयन आदि का संक्रमण बतलाते हुए ज्योतिष विद्या की मूल बातें बताई थी । ये तीसरे मनु क्षेमंकर को राज्य देकर स्वर्ग गये । महापुराण 3. 77-89, पद्मपुराण 3.77, हरिवंशपुराण 7.148-150, पाप0 2. 105

(2) तीर्थंकर वर्द्धमान का अपर नाम संजय और विजय नामक चारण ऋद्धिधारियों ने अपना उत्पन्न संदेह वर्द्धमान को देखते ही दूर हो जाने से प्रसन्न होकर वर्द्धमान का यह नाम रखा था । पद्मपुराण 74.282-283, पांडवपुराण 1.116 देखें महावीर


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=सन्मति&oldid=78385"
Categories:
  • स
  • पुराण-कोष
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 14 November 2020, at 16:58.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki