तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर

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तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर
दिन बड़े भये बैराग भाव, मिथ्यातम रजनीको घटाव।।तुम. ।।१ ।।
बहु फूली फैली सुरुचि बेलि, ज्ञाताजन समता संग केलि।।तुम. ।।२।।
`द्यानत' वानी पिक मधुररूप, सुर नर पशु आनँदघन सुरूप।।तुम. ।।३ ।।