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Category:Bhajan

From जैनकोष

अनुक्रमणिका के क्रम से विभिन्न कवियों के द्वारा रचित संपूर्ण भजन

Pages in category "Bhajan"

The following 200 pages are in this category, out of 394 total.

(previous page) (next page)

अ

  • अज्ञानी पाप धतूरा न बोय
  • अति संक्लेश विशुद्ध शुद्ध पुनि
  • अन्तर उज्जवल करना रे भाई!
  • अपनी सुधि भूल आप, आप दुख उपायौ
  • अब अघ करत लजाय रे भाई
  • अब घर आये चेतनराय
  • अब पूरी कर नींदड़ी, सुन जिया रे! चिरकाल
  • अब मेरे समकित सावन आयो
  • अब मोहि जानि परी
  • अब समझ कही
  • अरहंत सुमर मन बावरे
  • अरिरजरहस हनन प्रभु अरहन
  • अरे जिया, जग धोखे की टाटी
  • अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी
  • अरे हो अज्ञानी तूने कठिन मनुषभव पायो
  • अरे हो जियरा धर्म में चित्त लगाय रे
  • अरे! हाँ चेतो रे भाई
  • अहो दोऊ रंग भरे खेलत होरी
  • अहो यह उपदेशमाहीं

आ

  • आकुलरहित होय इमि निशदिन
  • आगै कहा करसी भैया
  • आज मैं परम पदारथ पायौ
  • आज सी सुहानी सु घड़ी इतनी
  • आतम अनुभव आवै जब निज
  • आतम अनुभव कीजै हो
  • आतम अनुभव सार हो, अब जिय सार हो, प्राणी
  • आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
  • आतम जान रे जान रे जान
  • आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
  • आतम जानो रे भाई!
  • आतम महबूब यार, आतम महबूब
  • आतम रूप अनूपम अद्भुत
  • आतमज्ञान लखैं सुख होइ
  • आतमरूप अनूपम है, घटमाहिं विराजै हो
  • आतमरूप सुहावना, कोई जानै रे भाई ।
  • आप भ्रमविनाश आप
  • आपा प्रभु जाना मैं जाना
  • आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी
  • आरति कीजै श्रीमुनिराजकी, अधमउधारन आतमकाजकी
  • आरति श्रीजिनराज तिहारी, करमदलन संतन हितकारी
  • आरसी देखत मन आर-सी लागी
  • आवै न भोगनमें तोहि गिलान

इ

  • इस जीवको, यों समझाऊं री!

उ

  • उत्तम नरभव पायकै
  • उरग-सुरग-नरईश शीस जिस, आतपत्र त्रिधरे

ए

  • ए मान ये मन कीजिये भज प्रभु तज सब बात हो
  • ए मेरे मीत! निचीत कहा सोवै

ऐ

  • ऐसा मोही क्यों न अधोगति जावै
  • ऐसा योगी क्यों न अभयपद पावै
  • ऐसी समझके सिर धूल
  • ऐसे जैनी मुनिमहाराज
  • ऐसे विमल भाव जब पावै
  • ऐसे साधु सुगुरु कब मिल हैं

औ

  • और अबै न कुदेव सुहावै
  • और ठौर क्यों हेरत प्यारा, तेरे हि घट में जानन हारा
  • और सबै जगद्वन्द मिटावो

क

  • कबधौं मिलै मोहि श्रीगुरु मुनिवर
  • कर कर आतमहित रे प्रानी
  • कर मन! निज-आतम-चिंतौन
  • कर रे! कर रे! कर रे!, तू आतम हित कर रे
  • करौ रे भाई, तत्त्वारथ सरधान
  • करौं आरती वर्द्धमानकी । पावापुर निरवान थान की
  • कर्मनिको पेलै, ज्ञान दशामें खेलै
  • कहा मानले ओ मेरे भैया
  • कहे सीताजी सुनो रामचन्द्र
  • काया गागरि, जोझरी, तुम देखो चतुर विचार हो
  • कारज एक ब्रह्महीसेती
  • काल अचानक ही ले जायगा
  • काहे पाप करे काहे छल
  • काहेको सोचत अति भारी, रे मन!
  • कींपर करो जी गुमान
  • कुमति कुनारि नहीं है भली रे
  • कौन काम अब मैंने कीनों, लीनों सुर अवतार हो

ख

  • खेलौंगी होरी, आये चेतनराय

ग

  • गरव नहिं कीजै रे, ऐ नर
  • गलतानमता कब आवैगा
  • गहु सन्तोष सदा मन रे! जा सम और नहीं धन रे
  • गाफिल हुवा कहाँ तू डोले, दिन जाते तेरे भरती में
  • गिरिवनवासी मुनिराज
  • गुरु कहत सीख इमि बार बार
  • गौतम स्वामीजी मोहि वानी तनक सुनाई

घ

  • घटमें परमातम ध्याइये हो, परम धरम धनहेत
  • घड़ि-घड़ि पल-पल छिन-छिन निशदिन

च

  • चन्द्रानन जिन चन्द्रनाथ के
  • चरखा चलता नाहीं (रे) चरखा हुआ पुराना (वे)
  • चाहत है सुख पै न गाहत है धर्म जीव
  • चित चिंतकैं चिदेश कब
  • चित्त! चेतनकी यह विरियां रे
  • चिदरायगुन सुनो मुनो
  • चिन्मूरत दृग्धारी की मोहे
  • चेतन अब धरि सहजसमाधि
  • चेतन कौन अनीति गही रे
  • चेतन खेलै होरी
  • चेतन तैं यौं ही भ्रम ठान्यो
  • चेतन निज भ्रमतैं भ्रमत रहै
  • चेतन प्राणी चेतिये हो,
  • चेतन यह बुधि कौन सयानी
  • चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ
  • चेतन! मान ले बात हमारी
  • चेतनजी! तुम जोरत हो धन, सो धन चलत नहीं तुम लार
  • चौबीसौं को वंदना हमारी

छ

  • छांडत क्यौं नहिं रे
  • छांडि दे या बुधि भोरी

ज

  • जग में जीवन थोरा, रे अज्ञानी जागि
  • जग में श्रद्धानी जीव जीवन मुकत हैंगे
  • जगत जन जूवा हारि चले
  • जगत में सम्यक उत्तम भाई
  • जगदानंदन जिन अभिनंदन
  • जपि माला जिनवर नामकी
  • जबतैं आनंदजननि दृष्टि परी माई
  • जम आन अचानक दावैगा
  • जय जय जग-भरम-तिमिर
  • जय श्री ऋषभ जिनंदा! नाश तौ करो स्वामी मेरे दुखदंदा
  • जहाँ रागद्वेष से रहित निराकुल
  • जाऊँ कहाँ तज शरन तिहारे
  • जानके सुज्ञानी जैनवानी की सरधा लाइये
  • जानत क्यों नहिं रे, हे नर आतमज्ञानी
  • जानत क्यौं नहिं रे
  • जानो धन्य सो धन्य सो धीर वीरा
  • जिन के भजन में मगन रहु रे!
  • जिन छवि तेरी यह
  • जिन छवि लखत यह बुधि भयी
  • जिन जपि जिन जपि, जिन जपि जीयरा
  • जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै
  • जिन रागद्वेष त्यागा वह सतगुरु हमारा
  • जिन स्वपरहिताहित चीन्हा
  • जिनबानी के सुनैसौं मिथ्यात मिटै
  • जिनराज चरन मन मति बिसरै
  • जिनराज ना विसारो, मति जन्म वादि हारो
  • जिनरायके पाय सदा शरनं
  • जिनवर-आनन-भान निहारत
  • जिनवरमूरत तेरी, शोभा कहिय न जाय
  • जिनवानी जान सुजान रे
  • जिनवानी प्रानी! जान लै रे
  • जिनवैन सुनत, मोरी भूल भगी
  • जियको लोभ महा दुखदाई, जाकी शोभा (?)
  • जिया तुम चालो अपने देश
  • जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा
  • जीव! तू भ्रमत सदीव अकेला
  • जीव! तैं मूढ़पना कित पायो
  • जीवन के परिनामनिकी यह
  • जे दिन तुम विवेक बिन खोये
  • जे सहज होरी के खिलारी
  • जो आज दिन है वो, कल ना रहेगा, कल ना रहेगा
  • जो तैं आतमहित नहिं कीना
  • ज्ञाता सोई सच्चा वे, जिन आतम अच्चा
  • ज्ञान ज्ञेयमाहिं नाहिं, ज्ञेय हू न ज्ञानमाहिं
  • ज्ञान सरोवर सोई हो भविजन
  • ज्ञानी ऐसी होली मचाई
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै 2
  • ज्ञानी जीव निवार भरमतम

झ

  • झूठा सपना यह संसार

त

  • तन देख्या अथिर घिनावना
  • तुम चेतन हो
  • तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर
  • तुमको कैसे सुख ह्वै मीत!
  • तू काहेको करत रति तनमें
  • तू तो समझ समझ रे!
  • तू स्वरूप जाने बिना दुखी
  • तू ही मेरा साहिब सच्चा सांई
  • तेरी भगति बिना धिक है जीवना
  • तेरी शांति छवि पे मैं बलि बलि जाऊँ
  • तेरी शीतल-शीतल मूरत लख
  • तेरी सुन्दर मूरत देख प्रभो
  • तेरे ज्ञानावरन दा परदा
  • तेरे दर्शन को मन दौड़ा
  • तेरे दर्शन से मेरा दिल खिल गया
  • तेरो करि लै काज वक्त फिरना
  • तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
  • तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा!
  • तोड़ विषियों से मन जोड़ प्रभु से लगन
  • तोरी पल पल निरखें मूरतियाँ
  • तोहि समझायो सौ सौ बार
  • त्यागो त्यागो मिथ्यातम, दूजो नहीं जाकी सम
  • त्रिभुवन आनन्दकारी जिन छवि
  • त्रिशला के नन्द तुम्हें वंदना हमारी

थ

  • थाँकी कथनी म्हानै
  • थांकी तो वानी में हो
  • थारा तो वैना में सरधान घणो छै

द

  • दियैं दान महा सुख पावै
  • दीठा भागनतैं जिनपाला
  • दुरगति गमन निवारिये, घर आव सयाने नाह हो
  • देखे सुखी सम्यकवान
  • देखो जी आदीश्वर स्वामी कैसा ध्यान लगाया है!
  • देखो भाई! आतमदेव बिराजै
  • देखो भाई! आतमराम विराजै

ध

  • धन धन जैनी साधु अबाधित
  • धन धन साधर्मीजन मिलनकी घरी
  • धनि ते प्रानि, जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान
  • धनि मुनि जिन की लगी लौ शिवओरनै
  • धनि मुनि जिन यह, भाव पिछाना
  • धनि मुनि निज आतमहित कीना
  • धन्य धन्य आज घड़ी कैसी सुखकार है
  • धन्य धन्य है घड़ी आजकी
  • धर्म बिन कोई नहीं अपना
  • धिक! धिक! जीवन समकित बिना
  • धोली हो गई रे काली कामली माथा की थारी
  • ध्यान कृपान पानि गहि नासी
  • ध्यान धर ले प्रभू को ध्यान धर ले
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