आतम अनुभव कीजै हो

From जैनकोष

आतम अनुभव कीजै हो
जनम जरा अरु मरन नाशकै, अनंतकाल लौं जीजै हो ।।आतम. ।।
देव धरम गुरु की सरधा करि, कुगुरु आदि तज दीजै हो ।
छहौं दरब नव तत्त्व परखकै, चेतन सार गहीजै हो ।।आतम. ।।१ ।।
दरब करम नो करम भिन्न करि, सूक्ष्मदृष्टि धरीजै हो ।
भाव करमतैं भिन्न जानिकै, बुधि विलास न करीजै हो ।।आतम. ।।२ ।।
आप आप जानै सो अनुभव, `द्यानत' शिवका दीजै हो ।
और उपाय वन्यो नहिं वनि है, करै सो दक्ष कहीजै हो ।।आतम. ।।३ ।।