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Category:आध्यात्मिक भक्ति

From जैनकोष

विभिन्न कवियों द्वारा रचित आध्यात्मिक भक्ति

Pages in category "आध्यात्मिक भक्ति"

The following 200 pages are in this category, out of 245 total.

(previous page) (next page)

अ

  • अज्ञानी पाप धतूरा न बोय
  • अति संक्लेश विशुद्ध शुद्ध पुनि
  • अन्तर उज्जवल करना रे भाई!
  • अपनी सुधि भूल आप, आप दुख उपायौ
  • अब अघ करत लजाय रे भाई
  • अब घर आये चेतनराय
  • अब पूरी कर नींदड़ी, सुन जिया रे! चिरकाल
  • अब मेरे समकित सावन आयो
  • अब मोहि जानि परी
  • अब समझ कही
  • अरहंत सुमर मन बावरे
  • अरे जिया, जग धोखे की टाटी
  • अरे हाँ रे तैं तो सुधरी बहुत बिगारी
  • अरे हो अज्ञानी तूने कठिन मनुषभव पायो
  • अरे हो जियरा धर्म में चित्त लगाय रे
  • अरे! हाँ चेतो रे भाई
  • अहो दोऊ रंग भरे खेलत होरी
  • अहो यह उपदेशमाहीं

आ

  • आकुलरहित होय इमि निशदिन
  • आगै कहा करसी भैया
  • आज सी सुहानी सु घड़ी इतनी
  • आतम अनुभव आवै जब निज
  • आतम अनुभव कीजै हो
  • आतम अनुभव सार हो, अब जिय सार हो, प्राणी
  • आतम काज सँवारिये, तजि विषय किलोलैं
  • आतम जान रे जान रे जान
  • आतम जाना, मैं जाना ज्ञानसरूप
  • आतम जानो रे भाई!
  • आतम महबूब यार, आतम महबूब
  • आतम रूप अनूपम अद्भुत
  • आतमज्ञान लखैं सुख होइ
  • आतमरूप अनूपम है, घटमाहिं विराजै हो
  • आतमरूप सुहावना, कोई जानै रे भाई ।
  • आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी
  • आरसी देखत मन आर-सी लागी
  • आवै न भोगनमें तोहि गिलान

इ

  • इस जीवको, यों समझाऊं री!

उ

  • उत्तम नरभव पायकै

ए

  • ए मेरे मीत! निचीत कहा सोवै

ऐ

  • ऐसा मोही क्यों न अधोगति जावै
  • ऐसी समझके सिर धूल
  • ऐसे विमल भाव जब पावै

औ

  • और ठौर क्यों हेरत प्यारा, तेरे हि घट में जानन हारा

क

  • कर कर आतमहित रे प्रानी
  • कर मन! निज-आतम-चिंतौन
  • कर रे! कर रे! कर रे!, तू आतम हित कर रे
  • करौ रे भाई, तत्त्वारथ सरधान
  • कर्मनिको पेलै, ज्ञान दशामें खेलै
  • कहा मानले ओ मेरे भैया
  • कहे सीताजी सुनो रामचन्द्र
  • काया गागरि, जोझरी, तुम देखो चतुर विचार हो
  • काल अचानक ही ले जायगा
  • काहे पाप करे काहे छल
  • काहेको सोचत अति भारी, रे मन!
  • कींपर करो जी गुमान
  • कुमति कुनारि नहीं है भली रे

ख

  • खेलौंगी होरी, आये चेतनराय

ग

  • गरव नहिं कीजै रे, ऐ नर
  • गलतानमता कब आवैगा
  • गहु सन्तोष सदा मन रे! जा सम और नहीं धन रे
  • गाफिल हुवा कहाँ तू डोले, दिन जाते तेरे भरती में

च

  • चरखा चलता नाहीं (रे) चरखा हुआ पुराना (वे)
  • चाहत है सुख पै न गाहत है धर्म जीव
  • चित्त! चेतनकी यह विरियां रे
  • चेतन अब धरि सहजसमाधि
  • चेतन खेलै होरी
  • चेतन निज भ्रमतैं भ्रमत रहै
  • चेतन प्राणी चेतिये हो,
  • चेतन! तुम चेतो भाई, तीन जगत के नाथ
  • चेतन! मान ले बात हमारी
  • चेतनजी! तुम जोरत हो धन, सो धन चलत नहीं तुम लार

छ

  • छांडत क्यौं नहिं रे
  • छांडि दे या बुधि भोरी

ज

  • जग में जीवन थोरा, रे अज्ञानी जागि
  • जग में श्रद्धानी जीव जीवन मुकत हैंगे
  • जगत जन जूवा हारि चले
  • जगत में सम्यक उत्तम भाई
  • जबतैं आनंदजननि दृष्टि परी माई
  • जम आन अचानक दावैगा
  • जहाँ रागद्वेष से रहित निराकुल
  • जानत क्यों नहिं रे, हे नर आतमज्ञानी
  • जानत क्यौं नहिं रे
  • जिन नाम सुमर मन! बावरे! कहा इत उत भटकै
  • जिन स्वपरहिताहित चीन्हा
  • जियको लोभ महा दुखदाई, जाकी शोभा (?)
  • जिया तुम चालो अपने देश
  • जीव तू अनादिहीतैं भूल्यौ शिवगैलवा
  • जीव! तू भ्रमत सदीव अकेला
  • जीव! तैं मूढ़पना कित पायो
  • जीवन के परिनामनिकी यह
  • जे दिन तुम विवेक बिन खोये
  • जे सहज होरी के खिलारी
  • जो आज दिन है वो, कल ना रहेगा, कल ना रहेगा
  • जो तैं आतमहित नहिं कीना
  • ज्ञाता सोई सच्चा वे, जिन आतम अच्चा
  • ज्ञान ज्ञेयमाहिं नाहिं, ज्ञेय हू न ज्ञानमाहिं
  • ज्ञान सरोवर सोई हो भविजन
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै
  • ज्ञानी ऐसो ज्ञान विचारै 2
  • ज्ञानी जीव निवार भरमतम

झ

  • झूठा सपना यह संसार

त

  • तन देख्या अथिर घिनावना
  • तुम चेतन हो
  • तुम ज्ञानविभव फूली बसन्त, यह मन मधुकर
  • तुमको कैसे सुख ह्वै मीत!
  • तू काहेको करत रति तनमें
  • तू तो समझ समझ रे!
  • तू स्वरूप जाने बिना दुखी
  • तेरे ज्ञानावरन दा परदा
  • तेरो करि लै काज वक्त फिरना
  • तेरो संजम बिन रे, नरभव निरफल जाय
  • तोकौं सुख नहिं होगा लोभीड़ा!
  • तोड़ विषियों से मन जोड़ प्रभु से लगन
  • तोहि समझायो सौ सौ बार
  • त्यागो त्यागो मिथ्यातम, दूजो नहीं जाकी सम

द

  • दियैं दान महा सुख पावै
  • दुरगति गमन निवारिये, घर आव सयाने नाह हो
  • देखे सुखी सम्यकवान
  • देखो भाई! आतमदेव बिराजै
  • देखो भाई! आतमराम विराजै

ध

  • धन धन साधर्मीजन मिलनकी घरी
  • धनि ते प्रानि, जिनके तत्त्वारथ श्रद्धान
  • धर्म बिन कोई नहीं अपना
  • धिक! धिक! जीवन समकित बिना
  • धोली हो गई रे काली कामली माथा की थारी
  • ध्यान धर ले प्रभू को ध्यान धर ले

न

  • न मानत यह जिय निपट अनारी
  • नगर में होरी हो रही हो
  • नरभव पाय फेरि दुख भरना
  • नहिं ऐसो जनम बारंबार
  • निज कारज काहे न सारै रे
  • निज जतन करो गुन-रतननिको, पंचेन्द्रीविषय
  • निजपुर में आज मची होरी
  • निजहितकारज करना भाई!
  • निपट अयाना, तैं आपा नहीं जाना

प

  • परनति सब जीवनकी
  • परमाथ पंथ सदा पकरौ
  • पल पल बीते उमरिया रूप जवानी जाती
  • पायो जी सुख आतम लखकै
  • पिया बिन कैसे खेलौं होरी
  • प्राणी लाल! छांडो मन चपलाई
  • प्राणी लाल! धरम अगाऊ धारौ
  • प्राणी! आतमरूप अनूप है, परतैं भिन्न त्रिकाल
  • प्राणी! सोऽहं सोऽहं ध्याय हो
  • प्रानी समकित ही शिवपंथा
  • प्रेम अब त्यागहु पुद्गल का

ब

  • बन्यौ म्हांरै या घरीमैं रंग
  • बाबा मैं न काहूका
  • बीतत ये दिन नीके, हमको

भ

  • भगवन्त भजन क्यों भूला रे
  • भजन बिन यौं ही जनम गमायो
  • भजो आतमदेव, रे जिय! भजो आतमदेव, लहो
  • भली भई यह होरी आई, आये चेतनराय
  • भलो चेत्यो वीर नर तू, भलो चेत्यो वीर
  • भववनमें, नहीं भूलिये भाई!
  • भवि कीजे हो आतमसँभार, राग दोष परिनाम डार
  • भाई काया तेरी दुखकी ढेरी
  • भाई कौन कहै घर मेरा
  • भाई! अब मैं ऐसा जाना
  • भाई! कहा देख गरवाना रे
  • भाई! ज्ञान बिना दुख पाया रे
  • भाई! ज्ञानका राह दुहेला रे 1
  • भाई! ज्ञानका राह सुहेला रे 2
  • भाई! ज्ञानी सोई कहिये
  • भाई! ब्रह्मज्ञान नहिं जाना रे
  • भाया थारी बावली जवानी चाली रे
  • भावों में सरलता
  • भैया! सो आतम जानो रे!
  • भोगारां लोभीड़ा, नरभव खोयौ रे अज्ञान
  • भ्रम्योजी भ्रम्यो, संसार महावन, सुख सो रमन्त

म

  • मंगल आरती आतमराम । तनमंदिर मन उत्तम ठान
  • मगन रहु रे! शुद्धातममें मगन रहु रे
  • मत कीज्यौ जी यारी
  • मत राचो धीधारी
  • मति भोगन राचौ जी
  • मन महल में दो दो भाव जगे
  • मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे
  • मन हंस! हमारी लै शिक्षा हितकारी!
  • मन! मेरे राग भाव निवार
  • महिमा जिनमतकी
  • मान न कीजिये हो परवीन
  • मानत क्यों नहिं रे
  • मानों मानों जी चेतन यह
  • मिथ्या यह संसार है, झूठा यह संसार है रे
  • मेरा साँई तौ मोमैं नाहीं न्यारा
  • मेरी मेरी करत जनम सब बीता
  • मेरे मन कब ह्वै है बैराग
  • मेरे मन सूवा, जिनपद पींजरे वसि, यार लाव न बार रे
  • मैं न जान्यो री! जीव ऐसी करैगो
  • मैं निज आतम कब ध्याऊंगा
  • मैं हूँ आतमराम
  • मैंने देखा आतमराम
  • मोहि कब ऐसा दिन आय है
  • मोही जीव भरम तमतैं नहिं
  • म्हांकै घट जिनधुनि अब प्रगटी

य

  • यह मोह उदय दुख पावै
  • यही इक धर्ममूल है मीता!
  • यारी कीजै साधो नाल

र

  • री! मेरे घट ज्ञान घनागम छायो
  • रे जिय! क्रोध काहे करै
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