भगवन्त भजन क्यों भूला रे

From जैनकोष

== भगवन्त भजन क्यों भूला रे == (राग सोरठ)

भगवन्त भजन क्यों भूला रे ।।टेक ।।
यह संसार रैन का सुपना, तन धन वारि बबूला रे ।।
इस जीवन का कौन भरोसा, पावक में तृण-पूलारे ।
काल कुदार लिये सिर ठाड़ा, क्या समझै मन फूला रे ।।१ ।।
स्वारथ साधै पाँच पाँव तू, परमारथ को लूला रे ।
कहु कैसे सुख पैहै प्राणी, काम करै दुखमूला रे ।।२ ।।
मोह पिशाच छल्यो मति मारै, निज कर कंध वसूला रे ।
भज श्रीराजमतीवर `भूधर', दो दुरमति सिर धूला रे ।।३ ।।