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Category:भूधरदासजी

From जैनकोष

कविवर भूधरदासजी :- आगरा (उ.प्र.) निवासी कविवर भूधरदासजी खण्डेलवाल जाति के प्रकाण्ड विद्वान के साथ-साथ अच्छे प्रवचनकार थे । आप शाहगंज स्थित दिगम्बर जैन मंदिर में नियमित शास्त्र-प्रवचन करते थे । आपका जन्म वि. सं. १७५० (सन् १६९३) एवं निधन सं. १८०६ (सन् १७४९ ई.) में हुआ । आपके द्वारा पार्श्वपुराण, जैन शतक एवं भूधर पद संग्रह की रचना की गई है । पार्श्वपुराण का समापन सं. १७८९ (सन् १७३२) में आगरा में किया गया । इस पुराण में तेईसवें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के नौ भवों का सुन्दर चित्रण किया गया है । जैन शतक में १०७ कवित्त, दोहे, सवैये और छप्पय हैं जो वैराग्यवर्धक रचना हैं । भूधरदासजी के आध्यात्मिक भजन जीवन में आस्था और विश्वास जागृत करते हैं ।

Pages in category "भूधरदासजी"

The following 41 pages are in this category, out of 41 total.

अ

  • अज्ञानी पाप धतूरा न बोय
  • अन्तर उज्जवल करना रे भाई!
  • अब पूरी कर नींदड़ी, सुन जिया रे! चिरकाल
  • अब मेरे समकित सावन आयो
  • अरे! हाँ चेतो रे भाई
  • अहो दोऊ रंग भरे खेलत होरी

आ

  • आयो रे बुढ़ापो मानी, सुधि बुधि बिसरानी

ऐ

  • ऐसी समझके सिर धूल

क

  • काया गागरि, जोझरी, तुम देखो चतुर विचार हो

ग

  • गरव नहिं कीजै रे, ऐ नर
  • गाफिल हुवा कहाँ तू डोले, दिन जाते तेरे भरती में

च

  • चरखा चलता नाहीं (रे) चरखा हुआ पुराना (वे)
  • चित्त! चेतनकी यह विरियां रे

ज

  • जग में जीवन थोरा, रे अज्ञानी जागि
  • जग में श्रद्धानी जीव जीवन मुकत हैंगे
  • जगत जन जूवा हारि चले
  • जपि माला जिनवर नामकी
  • जिनराज चरन मन मति बिसरै
  • जिनराज ना विसारो, मति जन्म वादि हारो

थ

  • थाँकी कथनी म्हानै

द

  • देखो भाई! आतमदेव बिराजै

न

  • निपट गंवार बीरा! थारी बान बुरी परी रे, बरज्यो मानत नाहिं
  • नैननि को वान परी, दरसन की

प

  • पुलकन्त नयन चकोर पक्षी
  • प्रभु गुन गाय रै, यह औसर फेर न पाय रे

भ

  • भगवन्त भजन क्यों भूला रे
  • भलो चेत्यो वीर नर तू, भलो चेत्यो वीर
  • भवि देखि छबी भगवान की

म

  • मन मूरख पंथी, उस मारग मति जाय रे
  • मन हंस! हमारी लै शिक्षा हितकारी!
  • मेरे मन सूवा, जिनपद पींजरे वसि, यार लाव न बार रे

ल

  • लगी लो नाभिनंदनसों

व

  • वे कोई अजब तमासा, देख्या बीच जहान वे, जोर तमासा सुपनेका-सा
  • वे मुनिवर कब मिलि है उपगारी

स

  • सब विधि करन उतावला, सुमरनकौं सीरा
  • सुन ज्ञानी प्राणी, श्री गुरु सीख सयानी
  • सुनि ठगनी माया, तैं सब जग ठग खाया
  • सुनि सुजान! पाँचों रिपु वश करि
  • सो गुरुदेव हमारा है साधो
  • सो मत सांचो है मन मेरे

ह

  • होरी खेलौंगी, घर आये चिदानंद कन्त
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  • This page was last edited on 28 February 2008, at 08:31.
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