मोहि कब ऐसा दिन आय है

From जैनकोष

मोहि कब ऐसा दिन आय है
सकल विभाव अभाव होंहिंगे, विकलपता मिट जाय है ।।मोहि. ।।
यह परमातम यह मम आतम, भेद-बुद्धि न रहाय है ।
ओरनिकी का बात चलावै, भेद-विज्ञान पलाय है ।।मोहि. ।।१ ।।
जानैं आप आपमें आपा, सो व्यवहार विलाय है ।
नय-परमान-निक्षेपन-माहीं, एक न औसर पाय है ।।मोहि. ।।२ ।।
दरसन ज्ञान चरनके विकलप, कहो कहाँ ठहराय है ।
`द्यानत' चेतन चेतन ह्वै है, पुदगल पुदगल थाय है ।।मोहि. ।।३ ।।