बन्यौ म्हांरै या घरीमैं रंग

From जैनकोष

बन्यौ म्हांरै या घरीमैं रंग ।।बन्यौ. ।।टेक ।।
तत्वारथकी चरचा पाई, साधरमी कौ संग ।।१ ।।बन्यौ. ।।
श्री जिनचरन बसे उर माहीं, हरष भयौ सब अंग ।
ऐसी विधि भव भवमैं मिलिज्यौ, धर्मप्रसाद अभंग ।।२ ।।बन्यौ. ।।