नगर में होरी हो रही हो

From जैनकोष

नगर में होरी हो रही हो
मेरो पिय चेतन घर नाहीं, यह दुख सुन है को।।नगर. ।।१ ।।
सोति कुमति राच रह्यो है, किहि विध लाऊं सो।।नगर.।।२ ।।
`द्यानत' सुमति कहै जिन स्वामी, तुम कछु शिक्षा दो।।नगर.।।३ ।।