मेरे मन कब ह्वै है बैराग

From जैनकोष

मेरे मन कब ह्वै है बैराग
राज समाज अकाज विचारौं, छारौं विषय कारे नाग।।मेरे. ।।१ ।।
मन्दिर वास उदास होयकैं, जाय बसौं बन बाग।।मेरे.।।२ ।।
कब यह आसा कांसा फूटै, लोभ भाव जाय भाग।।मेरे.।।३ ।।
आप समान सबै जिय जानौं, राग दोषकों त्याग।।मेरे.।।४ ।।
`द्यानत' यह विधि जब बनि आवै, सोई घड़ी बड़भाग ।।मेरे.।।५ ।।