• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

अकंपनाचार्य

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

हरिवंश पुराण सर्ग 20/श्लोक

मुनिसंघ के नायक थे (5) हस्तिनापुर में ससंघ इन पर बलि आदि चार मंत्रियों ने घोर उपसर्ग किया (33-34) जिसका निवारण विष्णुकुमार मुनि ने किया (62)।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

मुनि-संघ के आचार्य । इनके संघ में सात सौ मुनि थे । एक समय ये संघ सहित उज्जयिनी आये । उस समय उज्जयिनी में श्रीधर्मा नाम का नृप था । इस राजा के बलि, वृहस्पति, नमुचि और प्रह्लाद ये चार मंत्री थे । संघ के दर्शनों की राजा की अभिलाषा जानकर मंत्रियों ने राजा को दर्शन करने से बहुत रोका किंतु वह रुका नहीं । राजा के जाने से मंत्रियों को भी वहाँ जाना पड़ा । संपूर्ण संघ मौन था । मुनियों को मौन देखकर मंत्री अनर्गल बातें करते रहे । उनकी श्रुतसागर मुनि ते भेंट हुई । राजा के समक्ष श्रुतसागर से विवाद हुआ जिसमें मंत्री पराजित हुए । पराभव होने से कुपित होकर मंत्रियों ने श्रुतसागर मुनि को मारना चाहा किंतु संरक्षक देव ने उन्हें स्तंभित कर दिया जिससे वे अपना मनोरथ पूर्ण न कर सके । राजा ने भी उन्हें अपने देश से निकाल दिया । ये मंत्री घूमते हुए हस्तिनापुर आये थे । हस्तिनापुर में राजा पद्म का राज्य था । बलि आदि मंत्री राजा के विरोधी सिंहबल को पकड़कर राजा के पास लाने में सफल हो गये इससे राजा प्रसन्न हुआ और उन्हें अपना मंत्री बना लिया । इस कार्य के लिए उन्हें इच्छित वर मांग लेने के लिए भी कहा जिसे मंत्रियों ने धरोहर के रूप में राजा के पास ही रख छोड़ा । दैवयोग से ये आचार्य ससंघ हस्तिनापुर आवे । इन्हें देखकर बलि आदि ने भयभीत होकर धरोहर के रूप में रखे हुए वर के अंतर्गत राजा से सात दिन का राज्य माँग लिया । राज्य पाकर उन्होंने इन आचार्य और इनके संघ पर अनेक उपसर्ग किये जिनका निवारण विष्णु मुनि ने किया । (महापुराण 70.281-298), (हरिवंशपुराण - 20.3-60), (पांडवपुराण 7.39-73)


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=अकंपनाचार्य&oldid=123075"
Categories:
  • अ
  • पुराण-कोष
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:39.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki