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अरिंदम

From जैनकोष



(1) मासोपवासी एक मुनि । अयोध्या के राजा अजितंजय के पुत्र अजितसेन ने इन्हें आहार देकर पंचाश्चर्य प्राप्त किये थे । महापुराण 54.120-121, हरिवंशपुराण - 19.82

(2) जयकुमार के साथ दीक्षित उनका एक पुत्र । महापुराण 47. 281-283

(3) कोशल देश में स्थित साकेत नगरी के राजा अरिंजय का पुत्र । इसकी रानी श्रीमती तथा सुप्रबुद्धा पुत्री थी । महापुराण 72.25-28, 34

(4) महेंद्रनगर के राजा महेंद्र विद्याधर और उसकी रानी हृदयवेगा के सौ पुत्रों में ज्येष्ठ पुत्र, अंजनसुंदरी का भाई । पद्मपुराण - 15.13-16

(5) तीर्थंकर चंद्रप्रभ के पूर्वभव का पिता । पद्मपुराण - 20.25-30

(6) अक्षपुर नगर के राजा हरिध्वज और उसकी रानी लक्ष्मी का पुत्र । इसे किसी मुनि से सातवें दिन मरने और मरकर मल का काट होने की बात ज्ञात हो गई थी, अत: इसने अपने पुत्र प्रीतिंकर को यह सब बताकर मल में उत्पन्न कीट को मारने के लिए कह रखा था प्रीतिकर प्रयत्न करने पर भी उसे मार न सका था क्योंकि वह दिखायी देकर भी मल में ही शीघ्र प्रवेश कर जाता था । पद्मपुराण - 77.57-70

(7) विजयार्ध पर्वत की दक्षिणश्रेणी में स्थित किन्नरोद्गति नगर के स्वामी अर्चिमाली विद्याधर के दीक्षागुरु । हरिवंशपुराण - 19.80-82

(8) राजा विनमि का पुत्र । हरिवंशपुराण - 22.105


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