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अर्ककीर्ति

From जैनकोष

सिद्धांतकोष से

( महापुराण / सर्ग/श्लो.नं.)

-भरत चक्रवर्ती का पुत्र था 47/186-187। सुलोचना कन्या के अर्थ सेनापति जयसेन-द्वारा युद्ध में परास्त किया गया /44/71,72,344-45। गृहपति अकंपन-द्वारा समझाया जाने पर `अक्षमाला' कन्या को प्राप्तकर संतुष्ट हुआ /45/10-30। इसी से सूर्यवंश की उत्पत्ति हुई।

(पद्मपुराण - 5.4); ( पद्मपुराण - 5.260-261), ( हरिवंशपुराण - 3.1-7 )।


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पुराणकोष से

(1) भरत-क्षेत्र के विजयार्द्ध पर्वत की दक्षिणश्रेणी में स्थित रथनूपुर नगर के विद्याधर राजा ज्वलनजटी तथा उनकी रानी वायुवेगा का पुत्र, स्वयंप्रभा का सहोदर । इसका विवाह प्रजापति की पुत्री ज्योतिर्माला से हुआ था । इन दोनों के अमिततेज नामक पुत्र और सुतारा पुत्री थी । इसने पिता से राज्य प्राप्त किया था । इसकी पुत्री का विवाह इसके फूफा त्रिपृष्ठ के पुत्र विजय से हुआ था । अंत में इसने पुत्र अमिततेज को राज्य देकर विपुलमति चारण मुनि से दीक्षा धारण कर ली थी तथा कर्मों का नाश कर मुक्ति प्राप्त की थी । महापुराण 62.30-44, पांडवपुराण 4.4-13, 85-96 वीरवर्द्धमान चरित्र 3.71-75

(2) भरत के चरमशरीरी पांच सौ पुत्रों में प्रथम पुत्र । भरत के सेनापति जयकुमार के साथ सुलोचना नामक कन्या के निमित्त इसका संघर्ष हुआ था । काशी देश के राजा अकंपन ने अपनी पुत्री अक्षमाला इसे देकर इस संघर्ष को समाप्त किया था । सूर्यवंश का उद्भव इसी से हुआ था । सितयश इसका पुत्र था । महापुराण 43.127, 44.344-345, 45.10-30, पद्मपुराण - 5.4, 260-261, हरिवंशपुराण - 3.1-7, 11.130, 12. 7-9, पांडवपुराण 3.129-137

(3) राजा चंद्राभ और रानी सुभद्रा का पुत्र । महापुराण 74.135


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