एकत्वभावना

From जैनकोष



बारह भावनाओं में एक भावना । इस भावना में ज्ञान, दर्शन स्वरूपी आत्मा अकेला है, वह अकेला ही सुख-दु:ख का भोक्ता है, तपश्चरण और रत्नत्रय आदि से वह मोक्ष प्राप्त कर सकता है, ऐसा अदीन मन से चिंतन किया जाता है । महापुराण 11. 106,38. 184 पद्मपुराण 14.237-239, पांडवपुराण 25.90-92, वीरवर्द्धमान चरित्र 11. 35-43


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