• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

कारण समयसार

From जैनकोष

नयचक्र बृहद्/360-362 कारणकज्जसहावं समयं काऊण होइ ज्झायव्वं। कज्जं सुद्धसरूवं कारणभूदं तु साहणं तस्स।360। सुद्धो कम्मखयादो कारणसमओ हु जीव सब्भावो। खय पुणु सहावझाणे तहया तं कारणं झेयं।361। किरियातीदो सत्थो अणंतणाणाइसंजुतो अप्पा। तह मज्झत्थो सुद्धो कज्जसहावो हवे समओ।362। =कारण व कार्य समयसार को जानकर ध्यान करना चाहिए। कार्य समयसार शुद्धस्वरूप है तथा कारण समयसार उसका साधन है।360। शुद्ध तथा कर्मों के क्षय से कार्य समयसार होता है। कारणसमयसार जीव का स्वभाव है, स्वभाव के ध्यान करने से कर्मों का क्षय होता है। इसलिए कारणसमयसार का ध्यान करना चाहिए।361। क्रियातीत, प्रशस्त, अनंत ज्ञानादि से संयुक्त मध्यस्थ तथा शुद्ध आत्मा, कार्यसमयसार है। वही स्वभाव तथा समय है।

देखें समयसार ।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=कारण_समयसार&oldid=111750"
Categories:
  • क
  • द्रव्यानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 12 March 2023, at 14:55.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki