• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

क्षेमंकर

From जैनकोष



सिद्धांतकोष से

  1. यह तृतीय कुलकर हुए हैं। विशेष परिचय–देखें सोलह कुलकर निर्देश।
  2. विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर–देखें विद्याधर ।
  3. लौकांतिक देवों का एक भेद–देखें लौकांतिक_देव।
  4. लौकांतिक देवों का अवस्थान–देखें लोक - 7।


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ


पुराणकोष से

(1) तीसरे मनु/कुलकर इनकी आयु अटट वर्ष प्रमाण थी । शरीर आठ सौ धनुष की अवगाहना से युक्त था । ये सन्मति कुलकर के पुत्र थे । इन्होंने सिंह व्याघ्र आदि से भयभीत प्रजा के भय को दूर किया । इसीलिए उनको यह नाम मिला ये क्षेमंधर के पिता थे । महापुराण 3.90-100, पद्मपुराण - 3.78, हरिवंशपुराण - 7.150-152, पांडवपुराण 2. 104-105
(2) देशभूषण और कुलभूषण का पिता । यह सिद्धार्थ मगर का राजा था । कमलोत्सवा इसी की पुत्री थी । जब इसके दोनों पुत्र विरक्त होकर दीक्षित हो गये तो इसने शोकाकुल होकर अनशन व्रत ले लिया और मरकर भवनवासी देवों में सुवर्ण कुमार जाति के देवों का अधिपति महालोचन नाम का देव हुआ । पद्मपुराण - 39.158-178
(3) विजयार्ध की दक्षिण श्रेणी का एक नगर । महापुराण 19. 50, 53
(4) जंबूद्वीपस्थ पूर्वविदेह क्षेत्र के रत्नसंचय नगर के राजा और वज्रायुध के पिता । जब इन्हें वैराग्य हुआ तो लौकांतिक देव इनकी स्तुति के लिए आये । वज्रायुध को राज्य देकर ये दीक्षित हुए और इन्होंने तप करके केवलज्ञान प्राप्त किया । इन्हें भट्टारक भी कहा गया है । ये पुंडरीकिणी नगरी के राजा प्रियमित्र चक्रवर्ती के धर्मोपदेशक और दीक्षागुरु थे । महापुराण 63. 37-39, 112, 73.34-35 74. 236-240, पांडवपुराण 5.12-16, 30-31, वीरवर्द्धमान चरित्र 5.74-107
(5) सौधर्मेंद्र द्वारा स्तुत वृषभदेव का एक नाम । महापुराण 25. 173


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=क्षेमंकर&oldid=124602"
Categories:
  • क्ष
  • पुराण-कोष
  • करणानुयोग
  • प्रथमानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 27 November 2023, at 14:41.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki