• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

गुणार्थिक

From जैनकोष

राज वार्तिक/५/३८/३/५०१/९ यदि गुणोऽपि विद्यते, ननु चोक्तम् तद्विषयस्‍तृतीयो मूलनय: प्राप्तनोतीति; नैष दोष:; द्रव्‍यस्‍य द्वावात्‍मानौ सामान्‍यं विशेषश्‍चेति। तन्न सामान्‍यमुत्‍सर्गोऽन्‍वय: गुण इत्‍यनर्थान्‍तरम् । विशेषो भेद: पर्याय इति पर्यायशब्‍द:। तत्र सामान्‍यविषयो नय: द्रव्‍यार्थिक:। विशेषविषय: पर्यायार्थिक:। तदुभयं समुदितमयुतसिद्धरूपं द्रव्‍यमित्‍युच्‍यते, न तद्विषयस्‍तृतीयो नयो भवितुमर्हति, विकलादेशत्‍वान्नयानाम् । तत्‍समुदयोऽपि प्रमाणगोचर: सकलादेशत्‍वात्‍प्रमाणस्‍य। =प्रश्‍न‒(द्रव्‍य व पर्याय से अतिरिक्त) यदि गुण नाम का पदार्थ विद्यमान है तो उसको विषय करने वाली एक तीसरी (गुणार्थिक नाम की) मूल नय भी होनी चाहिए ? उत्तर‒यह कोई दोष नहीं है; क्‍योंकि द्रव्‍य के सामान्‍य और विशेष ये दो स्‍वरूप हैं। सामान्‍य, उत्‍सर्ग, अन्‍वय और गुण ये एकार्थ शब्‍द हैं। विशेष, भेद और पर्याय ये पर्यायवाची (एकार्थ) शब्‍द हैं। सामान्‍य को विषय करने वाला द्रव्‍यार्थिक नय है, और विशेष को विषय करने वाला पर्यायार्थिक। दोनों से समुदित अयुतसिद्धरूप द्रव्‍य है। अत: गुण जब द्रव्‍य का ही सामान्‍य रूप है तब उसके ग्रहण के लिए द्रव्‍यार्थिक से पृथक् गुणार्थिक नय की कोई आवश्‍यकता नहीं है; क्‍योंकि, नय विकलादेशी है और समुदाय रूप द्रव्‍य सकलादेशी प्रमाण का विषय होता है। (श्‍लोकवार्तिक ४/१/३३/श्‍लोक ८/२२०); (प्रवचनसार/तत्त्व प्रदीपिका/११४)।

गुणार्थिक नयनिर्देश का निषेध–(देखें नय - I.1.6)


पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=गुणार्थिक&oldid=120140"
Categories:
  • ग
  • द्रव्यानुयोग
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 17 November 2023, at 22:20.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki