• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:पंचास्तिकाय संग्रह-सूत्र - गाथा 24 - समय-व्याख्या

From जैनकोष



समओ णिमिसो कट्ठा कलाय णाली तदो दिवारत्ती । (24)

मासोडु अयण संवच्छरोत्ति कालो परायत्तो ॥25॥

अर्थ: 

[समयः] समय, [निमिषः] निमेष, [काष्ठा] काष्ठा, [कला च] कला, [नाली] घड़ी, [ततः दिवारात्रः] अहोरात्र, (दिवस), [मासर्त्वयनसंवत्सरम्] मास, ऋतु, अयन और वर्ष - [इति कालः] ऐसा जो काल (अर्थात् व्यवहारकाल) [परायत्तः] वह पराश्रित है ।

समय-व्याख्या: 

अत्र व्‍यवहारकालस्‍य कथंचित्‍परायत्तत्‍वं द्योतितम् । परमाणुप्रचलनायत्त: समय: । नयनपुटघटनायत्तो निमिष: । तत्‍संख्‍याविशेषत: काष्‍ठा कला नाली च । गमनमणिगमनायत्तो दिवारात्र: । तत्‍संख्‍याविशेषत: मास:, ऋतु:, अयनं, संवत्‍सर: इति । एवंविधो हि व्‍यवहारकाल: केवलकालपर्यायमात्रत्‍वेनावधारयितुमशक्‍यत्‍वात् परायत्त इत्‍युपमीयत इति ॥२४॥

समय-व्याख्या हिंदी : 

यहाँ व्यवहार-काल का कथंचित पराश्रितपना दर्शाया है ।

परमाणु के गमन के आश्रित समय है; आँख के मिचने से आश्रित निमेष है; उसकी (निमेष की) अमुक संख्या काष्ठा, कला और घडी होती है; सूर्य के गमन के आश्रित अहोरात्र होता है, और उसकी (अहोरात्र की) अमुक संख्या से मास, ऋतु, अयन और वर्ष होते हैं । ऐसा व्यवहार-काल केवल काल की पर्याय-मात्र-रूप से अवधारणा अशक्य होने से (पर की अपेक्षा बिना -- परमाणु, आँख, सूर्य आदि पर पदार्थों की अपेक्षा बिना -- व्यवहार-काल का माप निश्चित करना अशक्य होने से) उसे 'पराश्रित' ऐसी उपमा दी जाती है ॥२४॥

पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

इसी गाथा की तात्पर्य-वृत्ति टीका

समय-व्याख्या अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:पंचास्तिकाय_संग्रह-सूत्र_-_गाथा_24_-_समय-व्याख्या&oldid=115657"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 30 June 2023, at 13:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki