• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in
Shivir Banner

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:पंचास्तिकाय संग्रह-सूत्र - गाथा 59 - समय-व्याख्या

From जैनकोष



भावो कम्मणिमित्तो कम्मं पुण भावकरणं हवदि । (59)

ण दु तेसिं खलु कत्ता ण विणा भूदा दु कत्तारं ॥66॥

अर्थ: 

(रागादि) भाव कर्मनिमित्तक हैं, कर्म (रागादि) भावनिमित्तक हैं; परन्तु वास्तव में उनके (परस्पर ) कर्तापना नहीं है; तथा वे कर्ता के बिना भी नहीं होते हैं।

समय-व्याख्या: 

पूर्वसूत्रोदितपूर्वपक्षसिद्धांतोऽयम् । व्‍यवहारेण निमित्तमात्रत्‍वाज्जीवभावस्‍य कर्म कर्तृ, कर्मणोऽपि जीवभाव: कर्ता; निश्‍चयेन तु न जीवभावानां कर्म कर्तृ, न कर्मणो जीवभाव: । न च ते कर्तारमंतरेण संभूयेते; यतो निश्‍चयेन जीवपरिणामानां जीव: कर्ता कर्मपरिणामानां कर्म कर्तृ इति ॥५९॥

समय-व्याख्या हिंदी : 

यह, पूर्व-सूत्र में (५९वीं गाथा में) कहे हुए पूर्व-पक्ष के समाधान-रूप सिद्धान्त है ।

व्यवहार से निमित्त-मात्र-पने के कारण जीव-भाव का कर्म कर्ता है (औदयिकादि जीव-भाव का कर्ता द्रव्य-कर्म है), कर्म का भी जीव-भाव कर्ता है; निश्चय से तो जीव-भावों का न तो कर्म कर्ता है और न कर्म का जीव-भाव कर्ता है । वे (जीव-भाव और द्रव्य-कर्म) कर्ता के बिना होते हैं ऐसा भी नहीं है; क्योंकि निश्चय से जीव-परिणामों का जीव कर्ता है और कर्म-परिणामों का कर्म (पुद्गल) कर्ता है ॥५९॥

पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

इसी गाथा की तात्पर्य-वृत्ति टीका

समय-व्याख्या अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:पंचास्तिकाय_संग्रह-सूत्र_-_गाथा_59_-_समय-व्याख्या&oldid=115729"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 30 June 2023, at 13:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki