• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:पंचास्तिकाय संग्रह-सूत्र - गाथा 76 - समय-व्याख्या

From जैनकोष



सव्वेसिं खंदाणं जो अंतो तं वियाण परमाणू । (76)

सो सस्सदो असद्दो एक्को अविभागि मुत्तिभवो ॥84॥

अर्थ: 

सभी स्कन्धों का जो अंतिम भाग है, उसे परमाणु जानो। वह शाश्वत, अशब्द, एक अविभागी और मूर्तिभव (मूर्त रूप से उत्पन्न होने वाला) जानना चाहिए।

समय-व्याख्या: 

परमाणुव्याख्येयम् ।

उक्तानां स्कन्धरूपपर्यायाणां योऽन्त्यो भेदः स परमाणुः । स तु पुनर्विभागा-भावादविभागी, निर्विभागैकप्रदेशत्वादेकः, मूर्तद्रव्यत्वेन सदाप्यविनश्वरत्वान्नित्यः, अनादिनिधनरूपादिपरिणामोत्पन्नत्वान्मूर्तिभवः, रूपादिपरिणामोत्पन्नत्वेऽपि शब्दस्य परमाणुगुणत्वाभावात्पुद्गलस्कन्धपर्यायत्वेन वक्ष्यमाणत्वाच्चाशब्दो निश्चीयत इति ॥७६॥

समय-व्याख्या हिंदी : 

यह, परमाणु की व्याख्या है ।

पूर्वोक्त स्कन्ध-रूप पर्यायों का जो अंतिम भेद (छोटे-से-छोटा अंश) वह परमाणु है । और वह तो, विभाग के अभाव के कारण अविभागी है; निर्विभाग / एक-प्रदेशी होने से एक है । मूर्त-द्रव्य-रूप से सदैव अविनाशी होने से नित्य है । अनादि-अनन्त रुपादि के परिणाम से उत्पन्न होने के कारण *मूर्ति-प्रभव है । और रुपादि के परिणाम से उत्पन्न होने पर भी अशब्द है ऐसा निश्चित है, क्योंकि शब्द परमाणु का गुण नहीं है तथा उसका (शब्द का) अब (७९ वीं गाथा में) पुद्गल-स्कन्ध-पर्याय-रूप से कथन है ॥७६॥

*मूर्ति-प्रभव = मूर्त-पने-रूप से उत्पन्न होने वाला, अर्थात् रूप-गन्ध-रस-स्पर्श के परिणाम-रूप से जिसका उत्पाद होता है ऐसा । मूर्ति=मूर्त-पना

पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

इसी गाथा की तात्पर्य-वृत्ति टीका

समय-व्याख्या अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:पंचास्तिकाय_संग्रह-सूत्र_-_गाथा_76_-_समय-व्याख्या&oldid=115765"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 30 June 2023, at 13:26.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki