• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • ग्रन्थ
  • Discussion
  • View source
  • View history

ग्रन्थ

ग्रन्थ:प्रवचनसार - गाथा 247 - तत्त्व-प्रदीपिका

From जैनकोष



वंदणणमंसणेहिं अब्भुट्ठाणाणुगमणपडिवत्ती । (247)

समणेसु समावणओ ण णिंदिदा रागचरियम्हि ॥302॥

अर्थ: 

[श्रमणेषु] श्रमणों के प्रति [वन्दननमस्करणाभ्यां] वन्दन-नमस्कार सहित [अभ्‍युत्थानानुगमनप्रतिपत्ति:] अभ्‍युत्थान और अनुगमनरूप विनीत प्रवृत्ति करना तथा [श्रमापनय:] उनका श्रम दूर करना वह [रागचर्यायाम्] रागचर्या में [न निन्दिता] निन्दित नहीं है ॥२४७॥

तत्त्व-प्रदीपिका: 

अथ शुभोपयोगिश्रमणलक्षणमासूत्रयति -

शुभोपयोगिनां हि शुद्धात्मानुरागयोगिचारित्रतया, समधिगतशुद्धात्मवृत्तिषु श्रमणेषु वन्दन-नमस्करणाभ्युत्थानानुगमनप्रतिपत्तिप्रवृत्ति: शुद्धात्मवृत्तित्राणनिमित्त श्रमापनयनप्रवृत्तिश्च न दुष्येत्‌ ॥२४७॥

तत्त्व-प्रदीपिका हिंदी : 

अब, शुभोपयोगी श्रमणों की प्रवृत्ति बतलाते हैं :-

शुभोपयोगियों के शुद्धात्मा के अनुरागयुक्त चारित्र होता है, इसलिये जिनने शुद्धात्मपरिणति प्राप्त की है ऐसे श्रमणों के प्रति जो वन्दन-नमस्कार-अभ्‍युत्थान-अनुगमनरूप विनीत वर्तन की प्रवृत्ति तथा शुद्धात्मपरिणति की रक्षा की निमित्तभूत ऐसी जो श्रम दूर करने की (वैयावृत्यरूप) प्रवृत्ति है, वह शुभोपयोगियों के लिये दूषित (दोषरूप, निन्दित) नहीं है । (अर्थात् शुभोपयोगी मुनियों के ऐसी प्रवृत्ति का निषेध नहीं हैं) ॥२४७॥

पूर्व पृष्ठ

अगला पृष्ठ

इसी गाथा की तात्पर्य-वृत्ति टीका

तत्त्व-प्रदीपिका अनुक्रमणिका

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=ग्रन्थ:प्रवचनसार_-_गाथा_247_-_तत्त्व-प्रदीपिका&oldid=134655"
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 23 April 2024, at 13:55.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki