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ग्रन्थ:सर्वार्थसिद्धि - अधिकार 2 - सूत्र 22

From जैनकोष

तस्‍य तावत्‍स्‍वामित्‍वावधारणार्थमाह -

303. किस इन्द्रियका क्‍या विषय है यह बतला आये हैं। अब उनके स्‍वामीका कथन करना है, अत: सर्वप्रथम हो स्‍पर्शन इन्द्रिय कही है उसके स्‍वामीका निश्‍चय करनेके लिए आगेका सूत्र कहते हैं –
वनस्‍पत्‍यन्‍तानामेकम्।।22।।
वनस्‍पतिकायिक तकके जीवोंके एक अर्थात् प्रथम इन्द्रिय होती है ।।22।।
304. एकं प्रथनमित्‍यर्थ:। किं तत् ? स्‍पर्शनम्। तत्‍केषाम् ? पृथिव्‍यादीनां वनस्‍पत्‍यन्‍तानां वेदितव्‍यम्। तस्‍योत्‍पत्तिकारणमुच्‍यते- वीर्यान्‍तरायस्‍पर्शनेन्द्रियावरणक्षयोपशमे सति शेषेन्द्रियसर्वघाति-स्‍पर्धकोदये च शरीरनामलाभावष्‍टम्‍भे एकेन्द्रियजातिनामोदयवशर्तितायां च सत्‍यां स्‍पर्शनमेक-मिन्द्रियमाविर्भवति।
304. सूत्रमें आये हुए ‘एक’ शब्‍दका अर्थ प्रथम है। शंका – यह कौन है ? समाधान – स्‍पर्शन। शंका – वह किन जीवोंके होती है ? समाधान – पृथिवीकायिक जीवोंसे लेकर वनस्‍पतिकायिक तकके जीवों के जानना चाहि‍ए। अब उसकी उत्‍पत्तिके कारणका कथन करते हैं – वीर्यान्‍तराय तथा स्‍पर्शन इन्द्रियावरण कर्मके क्षयोपशमके होनेपर और शेष इन्द्रियोंके सर्वघाती स्‍पर्धकोंके उदयके होनेपर तथा शरीर नामकर्मके आलम्‍बनके होनेपर और एकेन्द्रिय जाति नामकर्मके उदयकी आधीनताके रहते हुए एक स्‍पर्शन इन्द्रिय प्रकट होती है।


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