चंद्रकांतशिला

From जैनकोष



चंद्रकांत मणि से निर्मित एक शिला । समवसरण में लतावन के मध्य इंद्रों के विश्राम के लिए ऐसी शिलाओं की रचना की जाती है । महापुराण 6.115,22.127, 63.236 तीर्थंकर वर्द्धमान निष्क्रमण काल में शिविका से उतरकर इसी शिला पर बैठे थे और और वहीं उन्होंने जिनदीक्षा ली थी । ये शिलाएँ रात्रि में चंद्रमा की किरणों का संस्पर्श पाकर द्रवीभूत होने लगती हैं । हरिवंशपुराण 2.7, 7.75, वीरवर्द्धमान चरित्र 12.86-100


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