• जैनकोष
    जैनकोष
  • Menu
  • Main page
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • Home
    • Dictionary
    • Literature
    • Kaavya Kosh
    • Study Material
    • Audio
    • Video
    • Online Classes
    • What links here
    • Related changes
    • Special pages
    • Printable version
    • Permanent link
    • Page information
    • Recent changes
    • Help
    • Create account
    • Log in

जैन शब्दों का अर्थ जानने के लिए किसी भी शब्द को नीचे दिए गए स्थान पर हिंदी में लिखें एवं सर्च करें

 Actions
  • Page
  • Discussion
  • View source
  • View history

चारित्रपाहुड गाथा 8

From जैनकोष

आगे कहते हैं कि इसप्रकार पहिला सम्यक्त्वाचरण चारित्र होता है -

तं चेव गुणविसुद्धं जिणसम्मत्तं सुमुक्खठाणाए ।
जं चरइ णाणजुत्तं पढं सम्मत्तचरणचारित्तं ।।८।।

तच्चैव गुणविशुद्धं जिनसम्यक्त्वं सु्मोक्षस्थानाय ।
तत् चरति ज्ञानयुक्तं प्रथमं सम्यक्त्वचरणचारित्रम् ।।८।।

इन आठ गुण से शुद्ध सम्यक् मूलत: शिवथान है ।
सद्ज्ञानयुत आचरण यह सम्यक्चरण चारित्र है ।।८।।

अर्थ - वह जिनसम्यक्त्व अर्थात् अरहंत जिनदेव की श्रद्धा नि:शंकित आदि गुणों से विशुद्ध हो उसका यथार्थ ज्ञान के साथ आचरण करे वह प्रथम सम्यक्त्वचरण चारित्र है, वह मोक्ष स्थान के लिए होता है ।

भावार्थ - सर्वज्ञभाषित तत्त्वार्थ की श्रद्धा नि:शंकित आदि गुण सहित, पच्चीस मल दोष रहित, ज्ञानवान आचरण करे उसको सम्यक्त्वाचरण चारित्र कहते हैं । वह मोक्ष की प्राप्ति के लिए होता है, क्योंकि मोक्षमार्ग में पहिले सम्यग्दर्शन कहा है, इसलिए मोक्षमार्ग में प्रधान यह ही है ।।८।।

Retrieved from "https://www.jainkosh.org/w/index.php?title=चारित्रपाहुड_गाथा_8&oldid=2936"
Categories:
  • कुन्दकुन्दाचार्य
  • अष्टपाहुड
  • चारित्रपाहुड
JainKosh

जैनकोष याने जैन आगम का डिजिटल ख़जाना ।

यहाँ जैन धर्म के आगम, नोट्स, शब्दकोष, ऑडियो, विडियो, पाठ, स्तोत्र, भक्तियाँ आदि सब कुछ डिजिटली उपलब्ध हैं |

Quick Links

  • Home
  • Dictionary
  • Literature
  • Kaavya Kosh
  • Study Material
  • Audio
  • Video
  • Online Classes

Other Links

  • This page was last edited on 20 December 2008, at 05:21.
  • Privacy policy
  • About जैनकोष
  • Disclaimers
© Copyright Jainkosh. All Rights Reserved
  • Powered by MediaWiki